लखनऊ,21 जुलाई 2019: राजीव गांधी स्टडी सर्किल ने उत्तर प्रदेश ने भारतीय राष्ट्र निर्माण और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी विषय पर प्रेस क्लब में संगोष्ठी का आयोजन किया। इसकी अध्यक्षता जस्टिस एच एम तिलहरी ने की मुख्य वक्ता प्रोफेसर सतीश राय थे।
समन्वयक डॉ विनोद चंद्रा और संगोष्ठी समन्वयक डा ध्रुव कुमार त्रिपाठी, डा परवेज आगा मसीह थे।
न्यायमूर्ति तिलहरी ने कहा कि भारत का संतुलित विकास गांधीवादी चिंतन व अर्थ व्यवस्था से हो सकता है। पाश्चात्य विचारों से केवल शहरों का विकास हो सकता है। यह विकास अनेक प्राकृतिक व सामाजिक समस्याओं को जन्म दे रहा है। गांवों से पलायन हो रहा है, बेरोजगारी बढ़ रही है। महात्मा गांधी दूरदर्शी थे। उन्होंने इन विसंगतियों को पहले ही देख लिया था। इससे बचने के सुझाव उन्होंने अपने आर्थिक चिंतन में दिए थे। यह आज भी प्रासंगिक है।
मुख्य वक्ता प्रो. सतीश राय ने कहा कि महात्मा गांधी भारत की आत्मा को पहचानते थे। इसीलिए उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में देश के आमजन को भी शामिल किया। यही विचार उनके आर्थिक चिंतन में झलकता है। उनका कहना था को वास्तविक भारत गांवों में निवास करता है। गांवों और कृषि के विकास के बिना भारत की उन्नति नहीं हो सकती। इसके लिए कृषि और ग्रामीण कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना होगा। कृषि को लाभप्रद बनाने का प्रयास करना होगा।






