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आक्सीजन की कमी से मौतें: फर्म की चेतावनी को जिम्मेदारों ने नहीं लिया गंभीरता से

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फर्म की चेतावनी को मेडिकल कालेज के जिम्मेदारों ने गंभीरता से नहीं लिया

गोरखपुर। काश ! लिक्विड आक्सीजन गैस के गहराते संकट को बीआरडी मेडिकल कालेज प्रशासन ने गंभीरता से लिया होता। लिक्विड आक्सीजन की सप्लाई करने वाली फर्म पुष्पा सेल्स भुगतान न करने के कारण सप्लाई रोकने की चेतावनी काफी पहले से दे रही थी लेकिन मेडिकल कालेज के जिम्मेदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगा। स्याह नतीजा 24 घंटे के भीतर दर्जनों मौतों के रूप में सामने है।

बृहस्पतिवार को भी प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक को पत्र भेजा गया था कि लिक्विड आक्सीजन देर रात तक खत्म हो जाएगा। बावजूद इसके जिम्मेदारों ने इसे बेहद हल्के अंदाज में लिया। मेडिकल कालेज पर लगभग 68 लाख रुपये का बकाया लिक्विड आक्सीजन सप्लाई करने वाली फर्म पुष्पा सेल्स का है। उसने लगातार चेतावनी दी कि हम भी आईनोक्स कंपनी को पैसा आरटीजीएस करते हैं तब वह लिक्विड आक्सीजन की सप्लाई करती है। फर्म की चेतावनी कोमेडिकल कालेज के जिम्मेदारों ने गंभीरता से नहीं लिया। दर्जनों पत्र और मेल मेडिकल कालेज को पुष्पा सेल्स ने भेजा कि बकाया नहीं मिला तो गैस की सप्लाई रोक देनी पड़ेगी। आश्र्चय कीबात तो यह रही कि ऐसी स्थिति में आक्सीजन गैस सिलिंडर तक की व्यवस्था पर्याप्त मेडिकल कालेज के पास नहीं थी। बीच के दिनों में मेडिकल कालेज प्रशासन बजट की कमी का रोना रोता रहा है।

आश्र्चय की बात तो यह है कि अखबारों में लगातार लिक्विड आक्सीजन की सप्लाई न करने की धमकी संबंधी खबरें प्रकाशित होती रहीं लेकिन इसका संज्ञान न तो मेडिकल कालेज प्रशासन ने लिया और न और न ही किसी अन्य प्रशासनिक तंत्र ने। पुष्पा सेल्स के दीपांकर शर्मा से उनके मोबाइल पर बृहस्पतिवार को बात की गयी थी तो उन्होंने कहा था कि भुगतान को लेकर मेडिकल कालेज को इतने पत्र लिखे गये हैं कि एक मोटी सी फाइल तैयार हो गयी है। लीगल नोटिस और मेल भी भेजा गया लेकिन मेडिकल कालेज प्रशासन ने कोई जवाब नहीं दिया। ऐसे में हम क्या कर सकते हैं हमें भी तो पैसा देकर गैस खरीदनी पड़ती है। 

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