नोटबंदी के बाद बची खुची कसर GST ने पूरी कर दी: अखिलेश

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प्रधानमंत्री 15 दिन पहले ही दीवाली ला देने की बात कर रहे हैं। वे जरा व्यापारियों से तो जाकर पूछें कि उनके लिए दीवाली पहले आ गई या फिर दीवाली से काफी पहले ही उनका दीवाला निकल गया

वृन्दावन, 09 अक्टूबर। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मोदी सरकार पर तीखे प्रहार करते हुए भाजपा को सबसे झूठी पार्टी करार दिया। उन्होंने कहा कि गरीबों की गरीबी दूर करने और उनके खातों में धन जमा करने के वादे कर नोटबंदी के बहाने छोटी से छोटी बचतें भी निकलवा ली गई और फिर रही-सही कसर जीएसटी लागू कर पूरी कर दी गई।
अखिलेश यहां यादव समाज के एक ट्रस्ट द्वारा वृन्दावन में करोडों की लागत से बनाए जाने वाले बहुमंजिला यादव भवन की आधारशिला रखने के लिए पहुंचे थे। इस मौके पर संवाददाताओं से मुलाकात में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की मोदी एवं योगी सरकारों पर जमकर भडास निकाली। उन्होंने दोनों ही नेताओं को धोखेबाज करार दिया।
उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री 15 दिन पहले ही दीवाली ला देने की बात कर रहे हैं। वे जरा व्यापारियों से तो जाकर पूछें कि उनके लिए दीवाली पहले आ गई या फिर दीवाली से काफी पहले ही उनका दीवाला निकल गया। रही बात गरीबों की, तो उसे तो न खील नजर आ रही है, और न ही बताशे। क्योंकि, उनसे उनका रोजगार ही छिन गया है। इस पर भी प्रधानमंत्री दीवाली जल्द ला देने की बात कहकर उल्टे उन्हें चिढा रहे हैं।

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सपा नेता ने कहा, जहां तक जीएसटी के मामलों में सुधार लाने की बात है तो प्रधानमंत्री अपने ही लोगों से आलोचना झेलने के बाद अब रोज समीक्षा के नाम पर छूटें देने की बात कर रहे हैं। अगर उन्हें जीएसटी की कमियां वास्तव में सुधारनी ही हैं तो व्यापारी जिन शिकायतों को शुरू से रखते आ रहे हैं उनका एक साथ ही निवारण क्यों नहीं कर देते।
अखिलेश यादव ने मोदी सरकार से सवाल किया, नोटबंदी से कौन सा और कितना भ्रष्टाचार कम हुआ है। इसका जवाब साल भर बाद भी नहीं दे पा रहे बीजेपी वाले।
उन्होंने कहा, सच तो यह है कि भ्रष्टाचार के जड से खात्मे की बात करने वाले उस पर लगाम लगाने में भी पूरी तरह विफल रहे हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री के गृह जनपद का उदाहरण ही काफी है जहां कमीशन के चक्कर में टेण्डर लटके रहे और आॅक्सीजन के अभाव में कई बच्चों को जान गंवानी पड गई। यह सिलसिला अभी भी जारी है। क्योंकि अक्सर कहीं न कहीं से मरीजों के असामयिक मौत की खबरें आ ही रही हैं।

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