बेसिक शिक्षा मंत्री डाक्टर सतीश द्विवेदी ने एचडीएफसी बैंक द्वारा पचास विद्यालयों के लिए दिये गये स्मार्ट टीवी का किया उद्घाटन, कहा, एक अपील पर कोरोना काल में सरकारी संस्थानों में अंशदान करने वालों में अव्वल रहे परिषदीय विद्यालय, 75 करोड़ दिया था अंशदान, दूसरे नम्बर पर था पंचायती राज
लखनऊ, 15 दिसम्बर 2020: प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में पुरातन छात्र परिषद का गठन होगा। उन विद्यार्थियों के माध्यम से विद्यालयों के कायाकल्प की कोशिश की जाएगी। इसके लिए शासन स्तर से जल्द ही शासनादेश जारी होगा। ये बातें प्रदेश सरकार के बेसिक शिक्षा मंत्री डाक्टर सतीश द्विवेदी ने कही। वे लखनऊ के नरहीं में एक परिषदीय विद्यालय से एचडीएफसी द्वारा पचास विद्यालयों के लिए दिए गये स्मार्ट टीवी के उद्घाटन समारोह में मंगलवार को बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि हम जब पढ़ते थे तो स्मार्ट क्लास की कल्पना भी नहीं कर सकते थे। आज यह सब देखने को मिल रहा है। हम जिस स्कूल में पढ़कर आये, वहां बैठने के लिए भवन भी नहीं था। यही उल्लेखनीय परिवर्तन है। आज 1,58,629 विद्यालय हैं। हमारे कई विद्यालय अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतर रहे हैं। आज भी कई उच्च विद्यालयों में स्मार्ट क्लास न हों लेकिन जहां सबसे निम्न आय वाले लोगों के बच्चे जहां पढ़ते हैं, उन स्कूलों के लिए स्मार्ट क्लास की व्यवस्था हो रही हो, वहां उद्घाटन करने में सबसे ज्यादा प्रसन्नता हो रही है।
अध्यापक अपने विद्यालय की व्यवस्था के लिए आस-पास के लोगों से करें अपील
डाक्टर सतीश द्विवेदी ने अध्यापकों से भी आह्वान किया कि आप सभी अपने आस-पास के लोगों से अपने स्कूल के लिए फर्नीचर आदि की व्यवस्था करने की निवेदन करिये। उन्होंने कहा कि हम अपने लिये कुछ नहीं मांग सकते लेकिन अपने विद्यालय की व्यवस्था ठीक करने के लिए मांगने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने उदाहरण दिया कि मदन मोहन मालवीय जी यदि हिचक किये होते तो इतना बड़ा काशी हिंदू विश्वविद्यालय खड़ा नहीं हुआ होता।
हम सभी की कोशिश कि परिषदीय विद्यालय हो जाएं स्मार्ट
उन्होंने कहा कि हम कोशिश कर रहे हैं कि प्रदेश के सभी परिषदीय विद्यालय स्मार्ट हो जायं। कई जिलों के कई विद्यालय आज स्मार्ट हो भी गये हैं। उसके लिए उन्होंने उदाहरण दिया कि हमारे विधानसभा क्षेत्र में एक अध्यापक ने अपने पैसे से ब्रेंच-डेस्क का इंतजाम कर दिया। हम सभी अध्यापकों से ऐसा करने के लिए नहीं कहेंगे, क्योंकि इतना ज्यादा वेतन नहीं मिलता लेकिन हम दूसरों से सहयोग तो ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि हम आज यहां एक कमरे में लगे टीवी का उद्घाटन करने नहीं आया हूं। मैं एक ऐसे कार्यक्रम में आया हूं, जहां पर आंखों पर लगे धूल को हटाया जा सकता है, जहां अभिभावक सोच भी नहीं सकता कि यहां ऐसा भी हो सकता है।
विद्यालय ऐसा बनाने को दृढ संकल्पित कि मजबूरी में नहीं स्वाभाविक रूप से अभिभावक बच्चों के भेंजे परिषदीय विद्यालय
उन्होंने कहा कि हम सरकारी विद्यालयों को ऐसा बनाने के लिए दृढ संकल्पित हैं कि लोग मजबूरी में नहीं स्वाभाविक रूप से सरकारी स्कूल में पढ़ाने के लिए प्रेरित करे। उन्होंने कहा कि आज सड़क से होकर गुजरने में परिषदीय विद्यालय को देखकर लग जाता है कि यह परिषदीय विद्यालय है। इसके लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। लोग खुद भी आगे आकर मदद कर रहे हैं।
कोरोना काल में दिए गये अंशदान की सराहना की
उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी में एक अपील पर परिषदीय विद्यालय के अध्यापकों व कर्मचारियों ने एक दिन के अंशदान दे दिया। हमने 75 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री को भेंट किया। उन्होंने कहा कि एक अपील पर प्रदेश के किसी भी सरकारी संस्थान में सबसे ज्यादा अंशदान परिषदीय विद्यालयों ने किया। दूसरे नम्बर पर पंचायती राज है, जिसका अंशदान 50 करोड़ रुपये के लगभग है। पूरे भारत में भी देखा जाय तो गृह मंत्रालय, जिसमें अर्धसैनिक बल आदि आते हैं, सबसे ज्यादा है, उसके बाद यूपी के परिषदीय विद्यालयों का ही सर्वाधिक अंशदान है।
नूतन प्रयोग के लगे थे स्टाल
इस कार्यक्रम में कोरोना काल में बेेसिक शिक्षा में अध्यापकों द्वारा शिक्षा के लिए कुछ किये गये नूतन प्रयोग की प्रदर्शनी भी लगायी गयी थी, जिसे देखकर बेसिक शिक्षा मंत्री ने अध्यापकों की सराहना की और उसे प्रेरणा मिशन की पत्रिका में छपवाने के लिए डाइरेक्टर को निर्देशित किया।







