विश्व संगीत दिवस: ज़ी टीवी के सितारों की ज़ुबानी, संगीत की जादुई दुनिया
हर साल 21 जून को विश्व संगीत दिवस (वर्ल्ड म्यूज़िक डे) मनाया जाता है, एक ऐसा दिन जो संगीत की उस सार्वभौमिक भाषा को समर्पित है, जो बिना अनुवाद के दिलों को जोड़ती है। यह लय, धुन और भावनाओं का उत्सव है, जो यादों को ताज़ा करता है, संस्कृतियों को एक करता है और जीवन के हर रंग को और गहरा बनाता है। इस खास मौके पर ज़ी टीवी के सितारों ने अपने जीवन में संगीत के महत्व को साझा किया, जो न सिर्फ उनके किरदारों को जीवंत करता है, बल्कि उनकी व्यक्तिगत ज़िंदगी में भी सुकून और प्रेरणा का स्रोत है।
संगीत: ज़िंदगी की धुन
‘सरू’ में सरू की भूमिका निभाने वालीं मोहक मटकर के लिए संगीत सिर्फ़ पृष्ठभूमि का शोर नहीं, बल्कि उनकी ज़िंदगी की धड़कन है। “संगीत मेरे लिए प्यार, हंसी और यादों का संगम है। एक गाना सुनते ही मैं उन लम्हों में खो जाती हूँ, जो मेरे दिल के करीब हैं,” मोहक ने मुस्कुराते हुए कहा। उनकी बातों में संगीत की वह ताकत झलकती है, जो पल भर में भावनाओं को उकेर देती है।
यादों का आलम: संगीत का जादू
‘वसुधा’ में वसुधा का किरदार निभाने वालीं प्रिया ठाकुर संगीत को अपनी यादों का खजाना मानती हैं। “कभी-कभी एक गाना सुनते ही पुरानी बातें ताज़ा हो जाती हैं। इस विश्व संगीत दिवस पर मैं अपने दोस्तों के साथ उस पुराने रिवाज को फिर से जीना चाहती हूँ, जहाँ हम एक गाना गाते थे, गलत बोल बोलते थे और ठहाकों के साथ हंस पड़ते थे।” प्रिया की यह बात संगीत की उस ताकत को दर्शाती है, जो हमें अपनों के करीब लाती है।
सेट से लेकर दिल तक
‘जाने अनजाने हम मिले’ में रीत की भूमिका निभाने वालीं आयुषी खुराना के लिए संगीत हर पल का साथी है। “चाहे सेट पर माहौल बनाना हो, थकान भरे दिन के बाद सुकून पाना हो या तैयार होते वक्त हल्की-सी धुन का मज़ा लेना हो, संगीत मेरे साथ होता है। यह मेरी ज़िंदगी का एक अटूट हिस्सा है,” आयुषी ने उत्साह से कहा। उनकी बातों में संगीत का वह रंग दिखता है, जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी को और खूबसूरत बनाता है।
थेरेपी है संगीत
‘जमाई नं. 1’ में नील का किरदार निभाने वाले अभिषेक मलिक संगीत को अपनी ज़िंदगी का सबसे बड़ा थैरेपिस्ट मानते हैं। “जब भी मैं तनाव में होता हूँ या थक जाता हूँ, संगीत मुझे संभाल लेता है। यह मेरे लिए एक ऐसी जगह है, जहाँ मैं खो जाता हूँ और फिर से खुद को पा लेता हूँ,” अभिषेक ने गहरे भाव से कहा। उनकी बातें संगीत की उस शक्ति को उजागर करती हैं, जो मन को शांति और आत्मा को ऊर्जा देती है।
संगीत: साँसों की तरह
‘कुमकुम भाग्य’ में पायल का रोल निभाने वालीं आर्ची सचदेवा के लिए संगीत जीवन का अभinn हिस्सा है। “संगीत मेरे लिए साँसों जैसा है। यह मुझे जगाता है, मेरे दिल को सुकून देता है और सबसे थके हुए पलों में भी नई जान डाल देता है।” आर्ची की यह बात संगीत की उस ऊर्जा को दर्शाती है, जो हर स्थिति में साथ देती है।
संगीत में बसी ज़िंदगी
‘जागृति- एक नई सुबह’ में जागृति की भूमिका निभाने वालीं रचना मिस्त्री के लिए संगीत जीवन के सबसे खूबसूरत लम्हों का प्रतीक है। “चाहे अकेले कमरे में नाचना हो, किसी पेड़ के नीचे बांसुरी की धुन सुनना हो या चुपके से कोई गाना गुनगुनाना हो, संगीत हमेशा मेरे साथ बोलता है। यह मेरी आत्मा का आईना है,” रचना ने भावुक होकर कहा। उनकी बातों में संगीत की वह गहराई नज़र आती है, जो हर इंसान के जीवन को छू लेती है।
संगीत का उत्सव
विश्व संगीत दिवस सिर्फ़ एक दिन नहीं, बल्कि एक अनुभव है, जो हमें याद दिलाता है कि संगीत हर सीमा, भाषा और संस्कृति से परे है। ज़ी टीवी के इन सितारों की बातें बताती हैं कि संगीत न सिर्फ़ उनके किरदारों को जीवंत करता है, बल्कि उनकी ज़िंदगी को भी रंगों से भर देता है। इस विश्व संगीत दिवस पर आइए, हम भी अपनी ज़िंदगी की धुन को सेलिब्रेट करें, चाहे वह कोई पुराना गाना हो, कोई बांसुरी की तान हो या फिर दिल से निकली कोई गुनगुनाहट। क्योंकि संगीत सिर्फ़ सुनने की चीज़ नहीं, बल्कि जीने का तरीका है।







