राकेश कुमार मिश्र
यह कहावतें, जैसे “बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले” या “सिर मुंडाते ही ओले पड़े,” इस समय राहुल गांधी के चुनाव आयोग के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान पर सटीक बैठती हैं। यह अभियान संवैधानिक मर्यादाओं को नजरअंदाज करता प्रतीत होता है। राहुल गांधी अपने आरोपों और दावों के साथ अपनी छवि को मजबूत करने की कोशिश में लगे हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ने प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया था कि आरोप लगाने वालों को या तो हस्ताक्षरित शपथपत्र देना होगा या देश से माफी मांगनी होगी। चुनाव आयोग मतदाताओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले गलत आरोपों पर चुप नहीं रहेगा।
विपक्षी नेताओं, विशेषकर राहुल गांधी और तेजस्वी यादव, ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर बीजेपी के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। वे संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों पर बिना पुख्ता सबूत के गंभीर आरोप लगाते रहे हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करने या माफी मांगने की बात कही, जिसे विपक्ष ने धमकी करार दिया। प्रेस वार्ता के बाद घटनाक्रम तेजी से बदले। उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र चुनाव में धांधली की याचिका खारिज कर दी और याचिकाकर्ता से सवाल किया कि उनके पास यह साबित करने के लिए क्या सबूत हैं कि शाम पांच बजे के बाद पड़े 76 लाख वोट धांधली से एक पार्टी के पक्ष में डाले गए।

न्यायालय ने यह भी पूछा कि आठ महीने बाद अब तक वे कहां थे। महाराष्ट्र उच्च न्यायालय भी ऐसी याचिका पहले खारिज कर चुका है। इसके अतिरिक्त, सीएसडीएस के सह-निदेशक संजय कुमार ने तीन दिन पहले माफी मांगते हुए कहा कि उनके द्वारा महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मतदाताओं की संख्या में वृद्धि के आंकड़े गलत थे और तुलनात्मक अध्ययन में त्रुटि थी।
उन्होंने उन आंकड़ों को हटा दिया। ये वही आंकड़े थे, जिन्हें राहुल गांधी और कांग्रेस ने धांधली के दावों का आधार बनाया था। कांग्रेस के मीडिया प्रभारी पवन खेड़ा ने भी इन आंकड़ों को हटाने का निर्णय लिया। कई मीडिया संस्थानों ने भी धांधली से संबंधित अपने वीडियो हटा लिए। मुख्य चुनाव आयुक्त ने बंगलौर सेंट्रल सीट के बारे में अपनी प्रेस वार्ता में स्थिति स्पष्ट की थी। इसके बावजूद, राहुल गांधी ने हाल ही में बिहार में वोट अधिकार यात्रा के दौरान सत्ता बदलने पर तीनों चुनाव आयुक्तों को देख लेने की बात कही।
यह सोच किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। मेरा मानना है कि चुनाव आयोग ने झूठे दावों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और कड़ी कार्रवाई की घोषणा करके सही कदम उठाया है। देश भी यही चाहता है कि अराजकता फैलाने और संवैधानिक संस्थानों की गरिमा को ठेस पहुंचाने वालों के साथ सख्ती से निपटा जाए।







