कोरोना काल में बढ़ रहे मनोग्रसित बाध्यता विकार के रोगी, बढ़े मन में अविश्वास तो जाएं साइकेट्रिक के पास

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साइकेट्रिक ने कहा, ऐसे ओसीडी के मरीजों के सबसे पहले कोरोना से जुड़ी खबरों को देखना बंद कर देना चाहिए, यह रोग दिमाग के चार तत्वों की कमी या अधिकता से होता है, रोगी को सलाह जरूरी

कोरोना महामारी के कारण मानसिक रोगों में सर्वाधिक ओसीडी (आब्सेसिव कम्प्यूलिसिव डिसआर्डर या मनोग्रसित बाध्यता विकार) लोग पीड़ित देखने को मिल रहे हैं। ऐसा कोरोना से जुड़ी खबरें लगातार देखने व हतोत्साहित होने के कारण हो रहा है। साइकेट्रिक्स के अनुसार बार-बार किसी काम को आवश्यकता से ज्यादा करने की स्थिति में परिजनों को तुरंत मनोचिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। यह रोग एंडोर्फिन, सेरोटिनिन, डोपामिन, ऑक्सीटोसिन के बढ़ जाने अथवा कम होने के कारण होता है। ऐसे मरीजों को कोरोना या नकारात्मक खबरों को देखना तुरंत बंद कर देना चाहिए।

Dr Prem Prakash

इस संबंध में साइकेट्रिक डाक्टर प्रेम प्रकाश ने बताया कि किसी काम को बार-बार करना। जैसे हाथ साफ होने के बावजूद हमेशा हाथ धोने की आदत या दरवाजा बंद कर देने के बावजूद बार-बार संदेह करना कि दरवाजा बंद है कि नहीं और बंद के बावजूद वहां जाना ओसीडी बीमारी के लक्षण हैं। इस बीमारी में लोगों का व्यवहार बदल जाता है। यदि ऐसा होने लगे तो लोगों को तुरंत साइकेट्रिक्स की सलाह लेनी चाहिए।

किसी विचार का मन में न चाहते हुए भी बार-बार विचार आना ओसीडी के लक्षण:

इसी तरह किसी विचार का बार-बार आना चाहने के बावजूद उसका मन से न हटना, उस विचार के कारण परेशान हो जाना भी ओसीडी की बीमारी के लक्षण हैं। कोराना काल में तमाम अवसाद की खबरों के कारण इस तरह के मरीजों की संख्या अधिक देखने को मिल रही है।

डोपामिन जुड़ा है उपलब्धि से कमी के कारण नहीं रह जाता विश्वास:

बाराबंकी जिला अस्पताल में कार्यरत सामाजिक मनोचिकित्सक डाक्टर प्रेम प्रकाश ने बताया कि हमारे दिमाग में स्थित केमिकल डोपामिन उपलब्धि से जुड़ा हुआ है। शरीर में यह होने पर आप अपने काम पर फोकस बनाए रखेंगे। यह रचनात्मकता और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करता है। उन्होंने हिन्दुस्थान समाचार से बताया कि इसकी कमी से आपको अपने काम पर ही विश्वास नहीं रह जाता, जबकि अधिकता से आपमें अहम की भावना पैदा हो जाती है।

आक्सीटाेसिन समर्पण के प्रति है उत्तरदायी, सेरोटोनिन बढ़ाता है नेतृत्व क्षमता

वहीं ऑक्सीटोसिन समर्पण और भरोसा बढ़ाता है ऑक्सीटोसिन काम से आपका जुड़ाव बढ़ाता है। इससे आफिस में ईमानदारी व भरोसा बढ़ाने में मदद होती है। सहकर्मियों से बेहतर संबंध के अलावा इससे आपके तनाव का स्तर कम करने में भी मदद मिलती है। इसकी कमी से लोगों में चिड़चिड़ापन आ जाता है। यह स्थिति भी वर्तमान में लोगों में देखने को मिल रही है। सेरोटोनिन नेतृत्व क्षमता बढ़ाता है सीरोटोनिन नेतृत्व क्षमता से जुड़ा केमिकल है। यह आपकी नेतृत्व क्षमता विकसित करने में मदद करता है। इससे आपकी ताकत बढ़ती है, आत्म विश्वास में इजाफा होता है। वहीं एंडोर्फिन दृढ़ निश्चयी और खुश रखता है। यह आपको दृढ़ निश्चयी बनाने में मदद करता है. इससे आपका मूड बेहतर बनता है और शारीरिक दर्द एवं भावनात्मक तनाव घटता है।

यदि ज्यादा हो जाएं ये तत्व तो जागृति हो जाती है अहम की भावना:

उन्होंने बताया कि इन तत्वों के ज्यादा होने पर लोगों में हद से ज्यादा शक्तिशाली का एहसास होने लगता है। जैसे वह हमेशा यही सोचने लगता है कि राष्ट्रपति को हमने बनाया, प्रधानमंत्री हमारे कारण बने हैं आदि बातें उसके मन में घर कर जाती हैं, लेकिन वर्तमान में इस रोग के मरीज कम देखने को मिल रहे हैं। ज्यादा लोग डिप्रेशन के ही शिकार हैं। ऐसे रोगियों के लिए जरूरी है कि वे तुरंत साइकेट्रिक्स की सलाह लें। उन्होंने कहा कि ऐसे रोगियों को पहले तो डिप्रेशन वाली खबरों को देखना बंद कर देना चाहिए।

शुरू में लोग नहीं जाना चाहते मनोचिकित्सक के पास:

उन्होंने बताया कि मनोरोग के संबंध में सर्वाधिक परेशानी की बात है कि लोग प्रथम चरण में इसे दिखाना नहीं चाहते। परिवार के लोग भी जानने के बावजूद साइकेट्रिक्स की सलाह नहीं लेते। जब यह मामला काफी बढ़ जाता है तब स्थितियां ज्यादा जटिल हो जाती। इसके बाद ही सामान्य तौर से लोग साइकेट्रिक्स की सलाह लेते हैं। ऐसे में कई बार मामला काफी बिगड़ चुका होता है और वह अनियंत्रित हो जाता है।

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