डूब गए हैं लोग सभी हैरानी में,
जाने क्या कह दी है बात रवानी में,
मुझको चुप रहने की आदत है वरना…
जानता हूँ मैं कौन है कितने पानी में।
– शौकत फ़हमी
एक रात, एक बात लिखूंगी,
एक रात, एक बात लिखूंगी,
खुद को दाग, तुझे साफ लिखूंगी।।
हकीकत में तू कभी मिलेगा नहीं,
एक किताब में अपनी मुलाकात की लिखूंगी –
- रे







