बेवजह का शौक न पाले, हर बच्चे को माँ का इंतजार होता है!

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बेमतलब का शौक न पाले हर माता तथा बच्चे को एक दूसरे का इंतजार होता है। अभी कुछ समय पहले एक किस्सा सुना था जिसमें एक चिड़िया होती है उसने अपने घोसलें दो प्यारे प्यारे बच्चे दिए वो रोज उनका ख्याल रखती और बच्चों के लिए खाना खोजकर लाती। एक दिन की बात है वह अपने बच्चों से बोल कर गयी कि बच्चों मैं तुम्हारे लिए भोजन लेने जा रही हूं और कुछ समय में आजाऊंगी। इतना कहकर वह वो उड़ गयी और थोड़ा उड़ने के बाद एक पेड़ पर बैठ गयी और भोजन को नीचे नज़रों से तलाशने लगी।

वह जिस पेड़ पर बैठी थी उसके पास एक स्कूल था जिसमें इंटरवेल हुआ था और बच्चे खेल रहे थे उसमे से एक बच्चें ने च्युइंगगम खाकर सड़क पर फ़ेंक दिया था और इंटरवेल ख़त्म होने के बाद बच्चे अंदर स्कूल चले गए। इसके बाद वह चिड़िया आयी और उस च्युइंगगम मुँह में लिया इसके बाद च्युइंगगम उसके मुँह में चिपक गया वह उसे छुड़ाने का बहुत प्रयास करती रही लेकिन वह छूटा नहीं उसके बाद उसने वहीँ दम तोड़ दिया। बच्चे इन्तजार करते रह गए। इसके बाद उसकी मान कभी नहीं लौटी !

यहाँ इन तस्वीरों को देने का मकसद सिर्फ इतना है कि हमें अपनी इंसानियत का हमेशा परिचय देना चाहिए और जीवों को बचाने का भरषक प्रयास करना चाहिए, जिससे उनका परिवार अपनी माँ से कभी न बिछड़े। इसलिए बेमतलब का शौक न पाले क्योकिं हर माता तथा बच्चे को एक दूसरे का इंतजार होता है।

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