प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण किया।
इसके साथ ही उन्होंने स्थापना समारोह में वर्ष 2019, 2020, 2021 2022 के लिए सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार भी प्रदान किए।

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत मां के वीर सपूत, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जन्मजयंती पर पूरे देश की तरफ से कोटि-कोटि नमन। जिन्होंने भारत की धरती पर पहली आज़ाद सरकार को स्थापित किया था, हमारे उन नेताजी की भव्य प्रतिमा आज डिजिटल स्वरूप में इंडिया गेट के समीप स्थापित हो रही है। जल्द ही इस होलोग्राम प्रतिमा के स्थान पर ग्रेनाइट की विशाल प्रतिमा भी लगेगी।

सुभाष चन्द्र बोस के जीवन संघर्ष से सम्बंधित कुछ बाते :
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को ओड़िशा के कटक शहर में हुआ था। उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और मां का नाम प्रभावती था।
नेता जी क्रांति से ही आजादी दिलाने के पक्षधर इसलिए उन्होंने इसमें विदेशों में रह कर अपनी भूमिका का बखूबी निर्वहन किया और नौजवानों को एकत्रित कर सन 1943 में आजाद हिन्द फौज का गठन किया।
वह महात्मा गांधी की अहिंसा वादी नीति से सहमत नहीं थे। इसीलिए उन्होंने नौजवानों में “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा” का नारा बुलंद किया और युद्ध लड़कर अंग्रेजों को परास्त करने में अपनी भूमिका निभाई।
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अंग्रेजो के खिलाफ लड़ने के लिए उन्होंने जापान के सहयोग से आजाद हिंद फौज का गठन किया। उनके द्वारा दिया गया , “जय हिंद” का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया। नेताजी की 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हॉल के सामने सुप्रीमो कमांडर के रूप में सेना को संबोधित करते हुए दिल्ली चलो का नारा दिया।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस सर्वकालिक नेता थे, वह ऐसे वीर सैनिक थे, इतिहास जिन की गाथा गाता रहेगा उनके विचार, कर्म और आदर्श अपनाकर राष्ट्र वह सब कुछ कर सकता है, जिसका वह हकदार है। नेता जी का कथन था – ” मुझे यह नहीं मालूम कि स्वतंत्रता के इस युद्ध में, हम में से कौन – कौन जीवित बचेंगे, परंतु मैं यह जानता हूं कि अंत में विजई हमारी ही होगी। यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का मूल्य खून से चुकाएं ।
और नेताजी सुभाष चंद्र बोस सुंदरता समर के अमर सेनानी, मां भारती के सच्चे सपूत थे। नेताजी भारतीय स्वाधीनता संग्राम के उन्हें योद्धाओं में से एक थे, जिनका नाम और जीवन आज भी करोड़ों देशवासियों को मातृभूमि के लिए समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा देता है। उनमें नेतृत्व के चमत्कारिक गुण थे। जिनके बल पर उन्होंने आजाद हिंद फौज की कमान संभाल कर अंग्रेजों को भारत से निकाल बाहर करने के लिए एक मजबूत सशस्त्र प्रतिरोध खड़ा करने में सफलता हासिल की।







