तख्तापलट की शुरुआत या महज अफवाहों का खेल
नई दिल्ली,/ इस्लामाबाद 17 जुलाई : पाकिस्तान की सियासत में एक बार फिर तूफान मचने की तैयारी है! सत्ता परिवर्तन की गर्मागर्म चर्चाओं ने इस्लामाबाद के गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक आग लगा दी है। खबर है कि सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर मौजूदा राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को सत्ता से बेदखल कर खुद राष्ट्रपति की कुर्सी संभाल सकते हैं। इतना ही नहीं, पाकिस्तान की संसदीय व्यवस्था को खत्म कर राष्ट्रपति शासन लागू करने की सनसनीखेज अटकलें भी जोर पकड़ रही हैं। क्या यह एक और तख्तापलट की शुरुआत है, या महज अफवाहों का खेल? आइए, इस सियासी ड्रामे की पूरी कहानी जानते हैं!
हाई-प्रोफाइल बैठकों ने उड़ाईं अफवाहों की आंधी
मंगलवार को पाकिस्तान में हाई-लेवल बैठकों का दौर चला, जिसने सियासी हलकों में हलचल मचा दी। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पहले राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की। इसके कुछ ही घंटों बाद, उन्होंने सेना प्रमुख आसिम मुनीर से पीएम हाउस में गहन चर्चा की। इन ताबड़तोड़ मुलाकातों ने सोशल मीडिया और पाकिस्तानी मीडिया को सनसनीखेज खबरों से भर दिया। दावे किए जा रहे हैं कि आसिम मुनीर न केवल जरदारी को हटाने की योजना बना रहे हैं, बल्कि देश की पूरी सत्ता को अपने हाथों में लेने की फिराक में हैं। पाकिस्तानी मीडिया के हवाले से खबर है कि इन बैठकों में 27वें संवैधानिक संशोधन की चर्चा हुई, जिसके तहत संसदीय व्यवस्था को खत्म कर अमेरिका जैसी राष्ट्रपति शासन प्रणाली लागू की जा सकती है। इस संशोधन से राष्ट्रपति के पास सारी शक्तियां केंद्रित हो जाएंगी, जैसा कि पूर्व में जनरल परवेज मुशर्रफ के शासनकाल में देखा गया था।

शहबाज शरीफ और ख्वाजा आसिफ का खंडन, लेकिन रहस्य बरकरार
इन सनसनीखेज अटकलों के बीच, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इन खबरों को सिरे से खारिज करते हुए इसे “महज अफवाह” और “देश को अस्थिर करने की साजिश” करार दिया। शरीफ ने कहा, “फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने कभी राष्ट्रपति बनने की इच्छा नहीं जताई, और न ही ऐसी कोई योजना है। मेरे, जरदारी और मुनीर के बीच आपसी सम्मान और पाकिस्तान की प्रगति का साझा लक्ष्य है।”
वहीं, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी इन चर्चाओं को “निराधार” बताकर खारिज किया। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति जरदारी मौजूदा सरकार और राजनीतिक प्रक्रिया के प्रति पूरी तरह आश्वस्त हैं।” हालांकि, जब उनसे 27वें संवैधानिक संशोधन के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे पूरी तरह नकारने के बजाय कहा, “संविधान संशोधन एक सामान्य विधायी प्रक्रिया है, और पहले भी कई संशोधन हो चुके हैं।” इस बयान ने अटकलों को और हवा दे दी।
विदेशी साजिश या आंतरिक सियासत?
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने इन अफवाहों को “विदेशी ताकतों” की साजिश करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “हमें पता है कि इस दुष्प्रचार अभियान के पीछे कौन है। राष्ट्रपति जरदारी, पीएम शरीफ और सेना प्रमुख मुनीर को निशाना बनाया जा रहा है।” नकवी ने दावा किया कि इन अफवाहों का मकसद देश में अस्थिरता पैदा करना है।
हालांकि, कुछ पाकिस्तानी पत्रकारों और सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि सेना प्रमुख आसिम मुनीर की महत्वाकांक्षा और सैन्य समर्थन इस सियासी उथल-पुथल की असल वजह हो सकती है। खासकर, पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद मुनीर की ताकत और प्रभाव में इजाफा हुआ है, जिससे उनकी सियासी महत्वाकांक्षा की चर्चाएं तेज हुई हैं।
बिलावल भुट्टो का गुस्सा और सियासी समीकरण
राष्ट्रपति जरदारी के बेटे और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के नेता बिलावल भुट्टो ने हाल ही में आसिम मुनीर की सार्वजनिक आलोचना की थी, जिसने इन अटकलों को और बल दिया। माना जा रहा है कि जरदारी और सेना के बीच पर्दे के पीछे तनाव चल रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि बिलावल को प्रधानमंत्री बनाने की चर्चा हो रही है, ताकि सत्ता का संतुलन बनाया जा सके।
27वां संशोधन: तख्तापलट की साजिश या सुधार की प्रक्रिया?सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि 27वां संवैधानिक संशोधन पाकिस्तान की सियासत को पूरी तरह बदल सकता है। इस संशोधन के जरिए संसदीय व्यवस्था को खत्म कर राष्ट्रपति को सर्वोच्च शक्तियां दी जा सकती हैं। कुछ पत्रकारों का कहना है कि इस बदलाव के बाद आसिम मुनीर न केवल राष्ट्रपति बन सकते हैं, बल्कि देश में सैन्य शासन की वापसी भी हो सकती है, जैसा कि अतीत में जनरल अयूब खान और परवेज मुशर्रफ के दौर में देखा गया था।
हालांकि, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी कोई योजना नहीं है। लेकिन, उनकी ओर से संविधान संशोधन को पूरी तरह नकार न जाना सवाल खड़े करता है।
क्या है सियासी हकीकत?
पाकिस्तान में सेना का सियासत में दखल कोई नई बात नहीं है। इतिहास गवाह है कि 1958, 1977 और 1999 में सैन्य तख्तापलट हो चुके हैं। आसिम मुनीर, जिनका कार्यकाल 2022 में तीन साल के लिए शुरू हुआ था, को हाल ही में पांच साल तक बढ़ा दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, भविष्य में इसे और बढ़ाया जा सकता है, जो उनकी ताकत को दर्शाता है।
दूसरी ओर, आसिफ अली जरदारी को पिछले साल ही शहबाज शरीफ के समर्थन के बदले पांच साल के लिए राष्ट्रपति बनाया गया था। लेकिन, बिलावल भुट्टो की हालिया बयानबाजी और सेना के साथ तनाव ने सियासी माहौल को गरमा दिया है।
सोशल मीडिया पर तूफान, यूट्यूब चैनल ब्लॉकसोशल मीडिया पर इन अटकलों ने आग पकड़ ली है। कई यूजर्स का दावा है कि आसिम मुनीर की सत्ता पर नजर है, और वह जरदारी को हटाकर सैन्य शासन की नींव रख सकते हैं। हैरानी की बात यह है कि इन खबरों को कवर करने वाले कई यूट्यूब चैनलों को ब्लॉक कर दिया गया है, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकार सच को दबाने की कोशिश कर रही है?
क्या होगा पाकिस्तान का भविष्य?
पाकिस्तान की सियासत इस समय उबाल पर है। एक तरफ शहबाज शरीफ और ख्वाजा आसिफ इन अटकलों को अफवाह बता रहे हैं, तो दूसरी ओर लगातार हाई-लेवल मीटिंग्स और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाएं कुछ और ही इशारा कर रही हैं। क्या आसिम मुनीर वाकई राष्ट्रपति की कुर्सी पर कब्जा करेंगे? क्या पाकिस्तान में एक बार फिर सैन्य शासन की वापसी होगी? या फिर यह सब विदेशी ताकतों की साजिश है, जैसा कि गृह मंत्री मोहसिन नकवी का दावा है? फिलहाल, इस्लामाबाद की सियासत रहस्यों से भरी हुई है, और हर नया दिन एक नया सियासी ड्रामा ला सकता है। क्या यह पाकिस्तान की सत्ता का अंतिम तख्तापलट होगा? जवाब के लिए हमें इंतजार करना होगा!







