उपभोक्ता परिषद की याचिका पर पावर कार्पोरेशन ने नहीं सबमिट किया जबाब परिषद ने कहा दाल में काला?
उपभोक्ता परिषद ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण प्रदेश के उपभोक्ताओ के हित में कैसे है ? इसका जबाब देने से क्यों बच रहा पावर कार्पोरेशन इसका सीधे मतलब है की दाल में कुछ काला है उपभोक्ता परिषद ने कहा कि उसने 14 सितम्बर को नियामक आयोग में एक लोकमहत्वा याचिका दाखिल कर यह मुद्दा उठाया था कि प्रदेश में निजीकरण का आगरा टोरेंट पावर पूरी तरह फेल साबित हुआ है आज उसको मंहगी बिजली खरीद कर सस्ती दर पर देने से रुपया 162 करोड़ का नुकसान हो रहा है। ऊपर से रुपया 2200 करोड़ पुराना बकाया दबा कर बैठ गयी है खामियाजा जनता भुगत रही इसलिए अब प्रदेश में पूर्वांचल निगम के निजीकरण प्रस्ताव पर विराम लगाने का आदेश आयोग पारित करे।
उपभोक्ता परिषद् ने अपनी याचिका में नियामक आयोग द्वारा पूर्व में पारित एक आदेश को संदर्भित किया गया था जिसमे आयोग द्वारा यह आदेश पारित किया गया था कि ’’डिस्कामों द्वारा जिन भी विद्युत क्षेत्रों में निजीकरण व फेंन्चाईजीकरण की भावी कार्ययोजना है उससे विद्युत उपभोक्ताओं को भविष्य में क्या लाभ होगा एवं निजीकरण एवं फे्रन्चाईजीकरण हेतु चयन का मुख्य आधार क्या है से आयोग को अवगत करायें।’’ पूरे मामले पर नियामक आयोग ने पावर कार्पोरेशन से 7 दिन में जबाब माँगा गया था जिस पर अब पावर कार्पोरेशन ने लिखित जबाब दाखिल कर आयोग को यह अवगत कराया है।
उपभोक्ता परिषद् की याचिका में उठाए गये बिंदु बिजली दर से सम्बंधित नहीं है इसलिए जबाब देना संभव नहीं फिर भी यदि आयोग प्रदेश में निजीकरण की सहभागिता के सम्बंद में कोई सूचना मांगता है तो पावर कार्पोरेशन उसे सौपेगा । उपभोक्ता परिषद ने कहा कि इस पूरे मामले पर बिजली दर की सुनवाई में चर्चा की मांग आयोग से की थी।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा पावर कार्पोरेशन अगर यह सोचता है की प्रदेश में चोर दरवाजे से गुपचुप कोई निजी घराना आएगा और पूर्वांचल पर कब्जा कर लेगा तो यह पावर कार्पोरेशन व सरकार की सबसे बड़ी भूल है। जब बिजली दर की सुनवाई चल रही है तो उपभोक्ता परिषद उसमे पूर्वांचल के निजीकरण पर चर्चा के लिए एक याचिका दी उस पर पॉवर कार्पोरेशन जबाब देने से क्यों बच रहा इसका मतलब उपभोक्ताओ का हित सुरक्षित नहीं ऐसे में उपभोक्ता परिषद निजीकरण नहीं होने देगा, चाहे जो बिधिक लड़ाई लड़नी पड़े एक तरफ पूर्वांचल पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम द्वारा आयोग में दाखिल बिजनेस प्लान में अगले 5 वर्षों में व्यापक सुधार के लिये रूपया 8801 करोड खर्च होना प्रस्तावित कर दिया है और यह स्वीकार किया है कि सुधार की योजनाओं पर काम शुरू हो गया है फिर भी जनहित में उसे निजी घरानों को सौंपने की साजिश करना अपने आप में बडा सवाल है।
उपभोक्ता परिषद् ने कहा पूर्वांचल के उपभोक्ताओ के करोड़ो अरबो वहा सिक्योरिटी जमा है सभी एसेट पर बिजली कम्पनिया उपभोक्ताओ पर 16 प्रतिशत आरओई लेती है और उल्टा बोलती है यह मामला बिजली दर से सम्बंधित नहीं यह गोलमाल नहीं चलेगा ।







