दूसरों की मदद करना भी सीखें…

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बात उस समय की है, जब गुरुनानक देव लाहौर यात्रा पर थे. उस समय वहां पर एक अजीब-सा नियम था. वो यह कि जिस व्यक्ति के पास जितनी अधिक संपत्ति होती, वह अपने घर के ऊपर उतने ही झंडे लगाता था. लाहौर में दुनीचंद्र के पास 20 करोड़ रुपये की संपत्ति थी, इसलिए उसके घर की छत पर 20 झंडे फहरा रहे थे. दुनीचंद्र को जब पता चला कि गुरुनानक जी लाहौर आये हैं, तो वो उनसे मिलने गया. दुनीचंद्र ने गुरुनानक जी से सेवा का अवसर मांगा. गुरुनानक जी ने उसे एक सुई देते हुए कहा, इसे ले जाइए और अगले जन्म में मुझे वापस कीजिएगा. दुनीचंद्र ने सुई ले ली, लेकिन उसने सोचा कि अगले जन्म में यह सुई मैं कैसे ले जा सकूंगा. वह वापस गुरुनानक जी के पास गया और उसने कहा, मरने के बाद मैं यह सुई कैसे ले जा सकता हूं?

गुरुनानक जी ने कहा, जब तुम एक सुई अपने अगले जन्म में नहीं ले जा सकते हो, तो इतनी सारी संपत्ति कैसे ले जा सकोगे? दुनीचंद्र ने जब यह बात सुनी तो उसकी आंखें खुल गयीं. इस घटना के बाद उसने सभी दीन-दुखियों की मदद करना शुरू कर दिया. आज यह कहानी इसलिए कि बीते दिनों एक अमीर बिजनेसमैन के घर मेरा एक रिपोर्टर साथी किसी स्टोरी के सिलसिले में गया. वहां उसने देखा कि उनका ड्राइवर उनसे कुछ हजार रुपये उधार मांग रहा है.

दरअसल, एडमिशन का दौर चल रहा है और उसे उसके बच्चे का एडमिशन अच्छे इंगलिश मीडियम स्कूल में करवाना था. लेकिन मालिक उसकी बात पर ध्यान ही नहीं दे रहे थे. वे उसे रुपये देने की बजाय, सुना रहे थे कि एक तो तुम टाइम पर नहीं आते हो. परसो मुझे मीटिंग में लेट हो गया. उस दिन तुमने मेरी गाड़ी का एक्सीडेंट करवा दिया, उसमें स्क्रैच लग गया. ऊपर से तुम्हें उधार चाहिए. ड्राइवर बोला ‘सर आप मुझे उधार मत दीजिए. मेरी दो महीने की सैलरी एडवांस दे दीजिए. तब भी चलेगा’, लेकिन मालिक ने ज्ञान देना शुरू कर दिया कि बड़े स्कूल में एडमिशन करवाने से कुछ नहीं होगा. अगर बच्चे का तेज दिमाग होगा, तो वह आम स्कूल में भी पढ़ कर दिखायेगा.

  • धन का संचय उतना ही करें, जितनी जरूरत हो. लालच के चलते हम धन संचय तो कर लेते हैं, लेकिन क्या हम उसे अगले जन्म में ले जा सकते हैं?
  • ऐसा पैसा किसी काम का नहीं, जो दूसरों के काम न आ सके. अगर आप अमीर हैं, तो लोगों की मदद करें, ताकि वो भी आगे बढ़ सकें.

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