- ‘‘उपभोक्ता परिषद आपके द्वार‘‘ कार्यक्रम के क्रम में अब राजनैतिक पार्टियों के राष्ट्रीय नेताओं से करेगा मुलाकात और मांगेगाा सहयोग
- सरकारी बकायों की 21 प्रतिशत वसूली, मंहगी बिजली खरीद पर प्रतिबन्ध, 5 प्रतिशत लाइन हानियों पर अंकुश में से किसी एक उपाय पर कम्पनियाॅ अमल कर बिना टैरिफ बढोत्तरी के चला सकती थीं अपना काम।
- जल्द उपभोक्ता परिषद राजनैतिक दलों के नेताओं से मिलकर मांगेगा सहयोग
लखनऊ 10 दिसम्बर। उप्र पावर कार्पोरेशन के दबाव में विद्युत नियामक आयोग द्वारा ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में लगभग 67 से 150 प्रतिशत की वृद्धि किसानों की 50 प्रतिशत व ग्रामीण दुकानदारों की 67 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई उसके खिलाफ जहाॅ पूरे प्रदेश में लगातार आन्दोलन हो रहे। वहीं दूसरी ओर उपभोक्ता परिषद द्वारा बिजली दर बढ़ोत्तरी के खिलाफ चलाये जा रहे आन्दोलन ‘‘उपभोक्ता परिषद आपके द्वार‘‘ कार्यक्रम के क्रम में अब पूरे प्रदेश मंे आम जनता व राजनैतिक पार्टियों को लामबंद करने के लिये अपना अभियान भी चलायेगा । देश प्रदेश की राजनैतिक पार्टियों के राष्ट्रीय नेताओं को भी इस गंभीर मुददे पर आगे आकर एकजुट होकर उप्र सरकार के ऊपर प्रभावी दबाव बनाना चाहिये जिससे प्रदेश की जनता की दरों में बढोत्तरी से राहत मिल सके। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष द्वारा बिजली दरों में बढ़ोत्तरी के खिलाफ राजनैतिक पार्टियों से सहयोग मांगने के लिये उनके राष्ट्रीय नेताओं को ज्ञापन सौंपेा जायेगा जिसमें बिजली दरों में व्यापक बढोत्तरी को वापस कराने के लिये उप्र सरकार पर दबाव बन सके ।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि अब उप्र सरकार जो अपने को गरीबों व आम जनता की हितैषी कहती है सही मायने में उसे आम जन मानस की चिन्ता है तो वह आगे आकर पावर कारपोरेशन प्रबन्धन को निर्देश दे कि उपभोक्ता परिषद के पुनर्विचार याचिका पर प्रदेश के उपभोक्ताओं को बिजली बढोत्तरी से राहत दिलाने की दिशा में उसका सहयोग करे।
वर्तमान में व्यापक बढोत्तरी से पूरे साल वर्ष 2017-18 यानि की इस वित्तीय वर्ष के बचे 04 माह में बिजली कम्पनियां प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं से कुल अतिरिक्त 2112 करोड़ राजस्व वसूलेग सही मायने में पावर कारपोरेशन यदि चाहता तो केवल सरकारी बकायों के 21 प्रतिशत वसूली करके उतना अतिरिक्त पैसा जमा कर लेता जितना टैरिफ बढोत्तरी से अतिरिक्त लाभ हो रहा है। वर्तमान में निजी घरानों से मंहगी बिजली खरीद पर यदि प्रतिबन्ध लगा दिया जाये तो बहुत आसानी से लगभग प्रत्येक वर्ष 2000 करोड रूपया बचाया जा सकता है। प्रदेश की बिजली कम्पनियाॅं केवल 5 प्रतिशत प्रत्येक वर्ष लाइन हानियों में कमी करके 2000 करोड रूपया बचा सकती थी परन्तु कागजों में केवल अभियान दिखायी देता है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि अनेको जिलों में एटीसी लाइन हानियाॅं 40 से 50 प्रतिशत तक है। और उसका खामियाजा पूरा प्रदेश भुगत रहा है। सवाल यह उठता है कि सरकार कब तक बिजली कम्पनियों की अक्षमता प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं पर डालती रहेगी। विगत दिनों बिलिंग घोटाले मं अरबों का खेल हुआ अगर बिलिंग घोटाले की सीएजी आडिट करायी जाती तो यह घोटाला 1000 करोड के ऊपर होता। अन्ततः उसे भी दबा दिया गया केवल सरकार जनता पर बोझ डालकर बिजली विभाग को खुशहाल देखना चाहीती है। यह कतई संभव होने वाला नही है।







