उपभोक्ता परिषद ने बोला हमला, कहा कुछ उच्चाधिकारी व एक कन्सलटेन्ट कम्पनी की भूमिका संदिग्ध
हंगामा मचने के बाद UPPCL ने भी बनाई एक कमेटी
लखनऊ,05 जनवरी। ऊर्जा मन्त्रालय, भारत सरकार की एनर्जी एफिसियेन्सी लि. (ईईएसएल) द्वारा 40 लाख स्मार्ट मीटर खरीद के मामले में चाइनीज कम्पनी का बोलबाला सामने आने का मामला अभी शान्त भी नहीं हुआ था कि अब ईईएसएल द्वारा उत्तर प्रदेश के लिए खरीदे जा रहे 1 करोड़ प्रीपेड मीटर की खरीद, जिसकी लागत 2 हजार करोड़ होगी, में भी चाइनीज कम्पनी का वर्चस्व फिर सामने आने लगा है।
उपभोक्ता परिषद ने पहले ही यह अंदेशा व्यक्त किया था कि मीटर खरीदवाने में लगी एक कन्सलटेन्ट कम्पनी व कुछ उच्चाधिकारियों की भूमिका चाइनीज कम्पनी के पक्ष में है। उसका सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ, विगत दिनों जब दिल्ली में ईईएसएल द्वारा प्री-बिड कान्फ्रेन्स बुलायी गयी तो 90% भारतीय बिडर ने टेण्डर विशिष्टीकरण में दिये गये तकनीकी मानक एसटीएस का विरोध किया, क्योंकि एसटीएस प्रणाली पर आधारित मानक साउथ अफ्रीका का मानक है और जो उत्तर प्रदेश में वर्तमान लागू स्लैब वाली टैरिफ पर काम नहीं कर सकता।
अभी तक उप्र में जो तकनीक कारगर है वह सीटीएस पद्धति की तकनीक है। प्री-बिड कान्फ्रेन्स में एक चाइनीज कम्पनी जो पूरी निविदा विषिष्टीकरण बनवाने में अहम् भूमिका निभाया है, उसने एसटीएस प्रणाली का सपोर्ट करते हुए निविदा विषिष्टीकरण को उचित बताया है। मामले पर हंगामा मचने के बाद अब उप्र पावर कार्पोरेषन प्रबन्धन द्वारा एक कमेटी बनाकर सभी पहलुओं को जाँचा-परखा जा रहा है, लेकिन जिस प्रकार से कुछ उच्चाधिकारी व एक कन्सलटेन्ट कम्पनी चाइनीज कम्पनी के सपोर्ट में लगे हैं उससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि एक बार फिर उत्तर प्रदेश में घटिया क्वालिटी के चाइनीज मीटरों की खरीद तय है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेष कुमार वर्मा ने कहा कि 1 करोड़ प्री-पेड मीटर खरीद की अब तक की पूरी प्रक्रिया की प्रदेश सरकार उच्च स्तरीय जाँच करा ले तो स्वतः स्पष्ट हो जायेगा कि अभी तक तैयार की गयी निविदा विषिष्टीकरण एक खास चाइनीज कम्पनी को लाभ दिलाने के लिए तैयार किया गया है। सबसे बड़ा चौंकाने वाला मामला यह है कि यदि एसटीएस प्रणाली पर आधारित निविदा विषिष्टीकरण के तहत 1 करोड़ मीटर की खरीद को अन्तिम रूप दिया गया तो इस प्रणाली पर खरीदे जा रहे प्री-पेड मीटर उत्तर प्रदेश में लागू टैरिफ के विभिन्न स्लैबों पर काम नहीं करेंगे और साउथ अफ्रीका की इस तकनीकी को आगे बढ़ाने पर इस पर रायल्टी भी उत्तर प्रदेश को देना पड़ेगा। अर्थात् मीटर तो लगेगा उत्तर प्रदेश में, लेकिन जब टोकेन जनरेट होगा तो साउथ अफ्रीका की एसटीएस एसोसियेशन को रायल्टी जायेगी, जो अपने आपमें बहुत ही गम्भीर मामला है। इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जाँच कराया जाना अत्यन्त आवष्यक है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से यह गुहार लगायी है कि प्रदेश में जिस प्रकार से करोड़ों-अरबों के मीटर खरीदे जा रहे हैं उस पर विशेष निगरानी के लिए एक उच्च स्तरीय स्वतंत्र कमेटी बनवायी जाये जो पूरी गुणवत्ता की छानबीन करे और यह भी पता लगाये कि वास्तव में निविदा विषिष्टीकरण उच्च भारतीय तकनीकी पर आधारित है अथवा नहीं।







