विजली कम्पनियों ने बैक डोर से 90% निजीकरण की प्रक्रिया हेतु टेण्डर निकालना किया चालू

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उपभोक्ता परिषद का बड़ा खुलासा कहा  इसका हर स्तर पर होगा विरोध

  • विजली कम्पनियों ने इसका नाम “एकीकृत सेवा प्रदाता“ रखा दक्षिणांचल में 3 सर्किल का टेण्डर निकला
  • पूरे प्रदेश में उरई, इटावा, कन्नौज, रायबरेली, सहारनपुर, बलिया, मऊ सर्किल  में “एकीकृत सेवा प्रदाता“ के माध्यम से विजली कनेक्शन देने से लेकर मीटर लगाने, राजस्व वसूलने सहित अन्य अनेकों कार्यों का होगा इनको जिम्मा। विजली अधिकारियों के पास केवल माॅनिटरिंग का इस  क्षेत्र में बचेगा काम।
लखनऊ,03 फरवरी। विद्युत अधिनियम 2003 में प्रस्तावित संशोधन के उपरान्त जहाँ प्रदेश के विजली अभियंताओं को इस बात का डर सता रहा है कि विजली कम्पनियों में निजीकरण शुरू होगा, वहीं उपभोक्ता परिषद आज जो खुलासा करने जा रहा है उसे पूरे प्रदेश के अभियंताओं के होश उड़ जायेंगे। आज से विजली कम्पनियों द्वारा प्रदेश में बैक डोर से निजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी और जिसका नाम “एकीकृत सेवा प्रदाता“ (इंटीग्रेटे सर्विस प्रोवाइडर) रखा है।
आज दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में उरई, इटावा, कन्नौज सर्किल का टेण्डर भी निकल गया। प्रथम चरण में पावर कार्पोरेशन के निर्णय अनुसार दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम  में उरई, इटावा, कन्नौज सर्किल को चुना गया है, मध्यांचल में रायबरेली, पश्चिमांचल में सहारनपुर और पूर्वांचल में बलिया  व मऊ सर्किल को चुना गया है।
आज दक्षिणांचल में जो टेण्डर “एकीकृत सेवा प्रदाता“ के नाम से निकाला गया है उसमें, जिस भी कम्पनी को यह टेण्डर मिलेगा उसे कनेक्शन देने, मीटर लगाने, बिल निर्गत करने, वसूली करने सहित दर्जनों वह अधिकार होंगे जो 90 प्रतिशत निजीकरण की श्रेणी में आता है। विजली विभाग के अभियंताओं के पास इस क्षेत्र की केवल माॅनिटरिंग रहेगी। यह कहना गलत नहीं होगा, यह प्रक्रिया 90 प्रतिशत निजीकरण है। पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन द्वारा इन सभी सर्किल में एटीसी हानियां अधिक होने के नाते “एकीकृत सेवा प्रदाता“ के रूप में टेण्डर निकाला गया है, लेकिन सभी अवगत ही होंगे, इसी प्रकार टोरेंट पावर आगरा को भी अधिक हानियों के चलते दिया गया था, जो आज बड़ा फायदा कमा रहा है और उपभोक्ताओं का उत्पीड़न किसी से छुपा नहीं।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि प्रदेश में बैक डोर से निजीकरण की प्रक्रिया चालू हो गयी और निजीकरण का विरोध करने वाले कार्मिक विद्युत अधिनियम में संशोधन होने के उपरान्त निजीकरण होने की सम्भावना व्यक्त कर रहे थे। सबसे बड़ा सवाल यह है जब उप्र में टोरेंट पावर व एनपीसीएल निजीकरण के प्रयोग से पूरी तरह से सिद्ध हो गया है, कि इससे इन्हीं निजी घरानों का फायदा हुआ है फिर ऐसे में कुछ अन्य निजी घरानों को फायदा पहंुचाने के लिए पुनः “एकीकृत सेवा प्रदाता“ के नाम से बैक डोर से निजीकरण की प्रक्रिया क्यों की जा रही है। उपभोक्ता परिषद इसका हर स्तर पर विरोध करेगा।
पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन द्वारा सभी चारो विजली कम्पनियों में जिन 7 सर्किलों में “एकीकृत सेवा प्रदाता“ का टेण्डर निकालने की प्रक्रिया चालू की गयी है, उसे कार्पोरेशन प्रबन्धन आदेशानुसार 28 मार्च तक पूरा हो जाना है और उन्हें एलओआई निर्गत कर देना है।  इन सभी सर्किलों में लगभग 3 लाख 72 हजार उपभोक्ता हैं।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि पहले ग्रामीण/किसानों की विजली दरों में 50 से 150 की वृद्धि करायी गयी और अब उनकी सेवाएं निजी घरानो के हवाले सौंपी जा रही है, जिसे उपभोक्ता परिषद किसी भी सूरत में कामयाब नहीं होने देगा, क्योकि इससे उपभोक्ताओं का उत्पीड़न बढ़ना तय है, इसी प्रकार की प्रक्रिया पहले मध्य प्रदेश में भी लागू हो चुकी है, लेकिन उसका कोई सार्थक  परिणाम सामने नहीं आया था। ऐसे में उ0प्र0 में जल्दबाजी में की जा रही कार्यवाही का हर स्तर पर उपभोक्ता परिषद विरोध करेगा।

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