- ‘‘एकीकृत सेवा प्रदाता‘‘ के नाम पर सात सर्किल के निजीकरण प्रक्रिया पर दलित व पिछडे वर्ग के अभियन्ता भडके कहा निजीकरण न हुआ वापस तो प्रदेश में हडताल तय।
- एसोसिएशन ने कल 05 फरवरी 2018 को आन्दोलन की आगामी रणनीति हेतु पुनः बुलाई कोर कमेटी की बैठक।
- पूरे प्रदेश के दलित व पिछडे वर्ग के अभियन्ताओं को एसोसिएशन ने हड़ताल के लिए तैयार रहने का दिया अल्टीमेटम।
लखनऊ,04 फरवरी। प्रदेश के उर्जा सेक्टर में दलितो व पिछडों की शीर्ष संगठन उप्र आॅफिसर्स एसोसिएशन की प्रान्तीय कार्यकारिणी की आज बुलाई गई एक अहम बैठक फील्ड हाॅस्टल कार्यालय में सम्पन्न हुई जिसमें पावर कार्पोरेशन द्वारा ‘‘एकीकृत सेवा प्रदाता‘‘ (इन्टीग्रेटेड सर्विस प्रोवाइडर) के नाम पर सात सर्किल उरई, इटावा, कन्नोज, रायबरेली, सहारनपुर, बलिया, मउ के निजीकरण की प्रक्यिा की घोर निन्दा करते हुए आर-पार की लडाई लडने का फैसला लिया गया है।

आज की आपात बैठक में एसोसिएशन ने पूरे प्रदेश के दलित व पिछडे वर्ग के अभियन्ताओं को निजीकरण के विरोध में आवश्यकता पडने पर हडताल पर जाने के लिए तैयार रहने को कहा है। एसोसिएशन की प्रान्तीय कार्य समिति ने दो टूक शब्दों में पावर कार्पाेरेशन प्रबन्धन से निजीकरण के इस पहल पर अविलम्ब विराम लगाने की मांग की हैं और एलान किया है कि निजीकरण पर विराम न लगा तो पूरे प्रदेश के दलित व पिछडे वर्ग के अभियन्ता हडताल पर जाने के लिए विवश होगें। एसोसिएशन की प्रान्तीय कोर समिति की कल 05 फरवरी 2018 को एक अहम बैठक बुलाई गई है जिसमें आगे के आन्दोलन की रणनीति बनाई जाएगी।
प्रान्तीय कार्यसमिति की बैठक के बाद उप्र पावर आफीसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष केबी राम, कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, अति. महासचिव अनिल कुमार, सचिव आरपी केन ट्ांसको अघ्यक्ष महेन्द्र सिहं, इं. एसपी सिंह, कोर कमेटी सदस्य संगठन सचिव व लेसा अध्यक्ष अजय कुमार संगठन सचिव इं. राधेश्याम, इं. राम नरेश, इं. धर्मेन्द्र कुमार, इं. आदर्श कौशल, इं. दिग्विजय सिंह, इं. पीपी सिंह, इं. चन्द्रशेखर व रंजीत कुमार ने कहा कि किसी भी सूरत में प्रदेश के उर्जा क्षेत्र में निजीकरण स्वीकार नही किया जाएगा जिस प्रकार से पूरे प्रदेश में दलित अभियन्ताओं का बडे पैमाने पर उत्पीडन किया जा रहा है और अब प्रबन्धन द्वारा निजीकरण की पहल करना किसी भी तरह न्यायोचित नही है। कार्पोेरेशन प्रबन्धन यदि यह सोचता है कि अनुरक्षण, मेन्टीनेन्स व सब स्टेशन के कार्य का पूरा जिम्मा बिजली अभियन्ता व कार्मिक उठाएंगें और निजी कम्पनियां टेण्डर हथिया कर फायदा कमांएगी तो उनकी यह मंशा कतई सफल होने नही दी जाएगी।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बिजली कम्पनियों के प्रबन्धन पर हमला बोलते हुए कहा पूरे प्रदेश में जहां पर लाइन हानियां ज्यादा है वहां पर जानबूझकर दलित अभियन्ताओं को तैनात किया जाता है और समीक्षा के नाम पर उनकी तुलना नोएडा जैसे वितरण खण्डों से कर के उनका उत्पीडन किया जाता है और बडे पैमाने पर उन्हे निन्दा प्रविष्टि व अन्य दण्ड दिए जा रहे है जो किसी भी सूरत में एसोसिएशन स्वीकार करने को तैयार नही है।







