- 12 फरवरी से बिजली कम्पनियों व जोनल कार्यालयों में शुरू होगा जनजागरण अभियान और निजीकरण का होगा व्यापक विरोध
- 3 मार्च से पूरे प्रदेश में काली पट्टी बाॅधकर दलित व पिछड़े वर्ग के अभियन्ता जतायेगें विरोध फिर भी फैसला न हुआ वापस तो हड़ताल व कार्य बहिष्कार पर होगा विचार
- एसोसिएशन के पदाधिकारी इस मुद्दे पर प्रदेश माननीय मुख्यमंत्री व ऊर्जा मंत्री से भी करेगें मुलाकात और निजीकरण पर रोक लगाने की करेगें माॅग
लखनऊ, 05 फरवरी। प्रदेश के उर्जा सेक्टर में दलितो व पिछडों के शीर्ष संगठन उप्र आॅफिसर्स एसोसिएशन की प्रान्तीय कार्यकारिणी की आज एक आपात बैठक फील्ड हाॅस्टल कार्यालय में सम्पन्न हुई जिसमें पावर कार्पोरेशन द्वारा ‘‘एकीकृत सेवा प्रदाता‘‘ (इन्टीग्रेटेड सर्विस प्रोवाइडर) के नाम पर सात सर्किल उरई, इटावा, कन्नौज, रायबरेली, सहारनपुर, बलिया, मउ के निजीकरण प्रक्रिया का विरोध करने हेतु भावी आन्दोलन की रूपरेखा तय की गयी।
प्रथम चरण में 12 फरवरी से एशोसिएसन द्वारा सभी बिजली कम्पनियों व जोनल कार्यालयों में दलित व पिछड़े वर्ग के अभियन्ताओं के बीच निजीकरण का विरोध हेतु जनजागरण अभियान चलाया जायेगा जिसमें निजीकरण से होने वाले नुकसान से कराया जायेगा अवगत और इसी बीच प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री व ऊर्जा मंत्री से एसोसिएशन के पदाधिकारी मुलाकात कर निजीकरण प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग करेगें। द्वितीय चरण का आन्दोलन 3 मार्च से शुरू किया जायेगा जिसमें पूरे प्रदेश में दलित व पिछड़े वर्ग के अभियन्ता काली पट्टी बाॅधकर पावर कारपोरेशन इस निर्णय का विरोध करेगें और फिर भी निर्णय वापस न हुआ तो आन्दोलन के अन्तिम चरण मेें हड़ताल व कार्य बहिष्कार जैसी कार्यवाही पर विचार होगा। इस बीच यदि निजीकरण की प्रक्रिया को तेज किया गया तो उस दौरान कोई भी आपात निर्णय लेने के लिये एशोसिएसन के अध्यक्ष केबी राम, कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, अति. महासचिव अनिल कुमार व सचिव आरपीकेन को अधिकृत किया गया है।
प्रान्तीय कार्यसमिति की बैठक के बाद उप्र पावर आफीसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष केबी राम, कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, अति. महासचिव अनिल कुमार, सचिव आरपी केन ट्ांसको अघ्यक्ष महेन्द्र सिहं, इं. एसपी सिंह, संगठन सचिव व लेसा अध्यक्ष अजय कुमार, सिविल इकाई अध्यक्ष बीना दयाल, संगठन सचिव इं. राधेश्याम, राज कपूर, आनन्द कुमार कनौजिया, अजय कनौजिया ने कहा कि जिस प्रकार से पावर कारपारेशन में कन्सलटेन्टो का मकड़जाल फैलता जा रहा है यह उसी का नतीजा है कि कन्सलटेन्टों की रिपोर्ट के आधार पर प्रबन्धन निजीकरण जैसी कार्यवाही पर आमादा है।
पदाधिकारियों का कहना है कि यदि प्रबन्धन यह सोचता है कि बिजली सप्लाई व मेन्टीनेन्स का कार्य विभागीय अभियन्ता करेगें और फायदा लेने के लिये निजी घराने बिलिंग मीटरिंग कनेक्शन देने इत्यादि का काम करेगें तो एशोसिएसन इस कार्यवाही को सफल नहीं होने देगा। अभी भी समय है पावर कारपोरेशन प्रबन्धन को अपने इस फैसले को वापस लेना चाहिये जिससे ऊर्जा क्षेत्र में आपसी भाई चारा बना रहे।






