आयोग प्रदेश के अन्य 4 ग्रामीण क्षेत्रों में कराये अतिरिक्त सार्वजनिक सुनवाई: उपभोक्ता परिषद

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  • नियामक आयोग द्वारा बिजली कम्पनियों की व्यापक बिजली दर वृद्धि पर आम जनता की राय लेने के लिये 20 सितम्बर से सार्वजनिक सुनवाई शुरू, 22 सितम्बर को नोयडा में
  • आयोग द्वारा बनारस व लखनऊ में सार्वजनिक सुनवाई की तिथि बाद में होगी घोषित
  • उपभोक्ता परिषद ने उठायी मांग कहा ग्रामीण व किसानों की बिजली दरों में हो रही है व्यापक वृद्धि। इसलिये आयोग कम से कम प्रदेश के अन्य 4 ग्रामीण क्षेत्रों में कराये अतिरिक्त सार्वजनिक सुनवाई
  • पावर कारपोरेशन आधी अधूरी सूचना के आधार पर दबाव बनाकर कराना चाहता है जल्दबाजी में सार्वजनिक सुनवाई जिससे जल्द हो टैरिफ जारी उपभोक्ता परिषद नही होने देगा कामयाब

लखनऊ, 14 सितम्बर। प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा मल्टी ईयर टैरिफ के अन्तर्गत वर्ष 2017-18 के लिये प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की दरों मंे औसत 22.48 प्रतिशत प्रस्तावित वृद्धि खास तौर पर ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में अधिकतम 350 प्रतिशत प्रस्तावित वृद्धि पर आम जनता की राय लेने के लिये नियामक आयोग द्वारा 2 बिजली कम्पनियों में सार्वजनिक सुनवाई की घोषणा कर दी गयी है। आयोग द्वारा जारी आदेश में दक्षिणाॅंचल व केस्को कम्पनी की सुनवाई 20 सितम्बर 2017 को कानपुर में तय की गयी है और पश्चिमाॅंचल व नोयडा पावर कम्पनी की सार्वजनिक सुनवाई 22 सितम्बर 2017 को नोयडा में तय की गयी है। आयोग द्वारा स्थान की सूचना बाद में दी जायेगी। आयोग द्वारा जारी अपने सार्वजनिक सूचना संबंधी आदेश में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि छोटे व भारी उद्योगों की बिजली दरों मंे कोई भी बढोत्तरी बिजली कम्पनियों द्वारा प्रस्तावित नही की गयी है लेकिन वहीं दूसरी ओर ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में 145 प्रतिशत व किसानों की दरों में 70 प्रतिशत की वृद्धि प्रस्तावित की गयी है। उपभोक्ता परिषद ने प्रस्तावित बिजली दर वृद्धि पर अपनी पूरी तैयारी कर ली है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोेक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि चूॅंकि ग्रामीण व किसानों की दरों में सबसे ज्यादा वृद्धि प्रस्तावित की गयी है इसलिये कम से कम 4 अतिरिक्त सार्वजनिक सुनवाई भविष्य में प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों मंे की जाये। जिसके लिये जल्द ही उपभोक्ता परिषद आयोग के सामने यह प्रस्ताव रखेगा। आयोग द्वारा पूर्व की भाॅंति बनारस व लखनऊ में भविष्य में सार्वजनिक सुनवाई आयोजित कर टैरिफ आदेश को अंतिम रूप देना चाहता है। लेकिन सबसे बडा सवाल यह है कि प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा पावर परचेज कास्ट के बारे में आयोग आदेशानुसार अभी तक संशोधित सूचना सार्वजनिक नही की है। ऐसे में अभी आधी अधूरी सूचना पर आम जनता अपनी क्या राय देगी? सभी को पता है टैरिफ का लगभग 80 प्रतिशत पावर परचेज कास्ट का भाग होता है। ऐसे में आयोग का भी नैतिक कर्तव्य है कि वह प्रदेश की जनता केा सुलभ आपत्ति रखने हेतु पूरी सूचना सार्वजनिक कराये।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा पावर कारपोरेशन के उच्चाधिकारी जानबूझकर आयोग को आधी अधूरी सूचना देकर टैरिफ को जारी कराना चाहते हैं। जो पूरी तरह प्रदेश की आम जनता के साथ बडा अन्याय साबित होगा। जरूरत पडने पर इस मामले पर उपभोक्ता परिषद प्रदेश सरकार के सामने भी अपनी मांग रखेगा।

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