अडानी सहित सोलर पावर के 5 निजी घरानों के मामले में सुनवाई कल

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उपभोक्ता परिषद ने महंगी दर का विरोध करने का किया फैसला

  • उपभोक्ता परिषद का बड़ा आरोप जब देश में सोलर पावर की दरें रू0 3 से 4 प्रतियूनिट के बीच ऐसे में आयोग द्वारा प्रस्तावित रू. 5.21 प्रतियूनिट की दर बहुत ज्यादा
  • उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से की मांग अब तक सोलर पावर की महंगी दरों के पूरे मामले की सरकार करा ले सीबीआई जांच तो होगा बड़ा खुलासा।
लखनऊ, 30 जनवरी। उप्र में सोलर पावर लगाने वाले निजी घराने मेसर्स अडानी, मेसर्स सहर्सधारा, मेसर्स पीनैकल, मेसर्स टेकनिकल एसोसिएट, मेसर्स अवध रबड़ व मेसर्स सुधाकर इन्फ्राटेक की याचिका पर कल 31 जनवरी को विद्युत नियामक आयोग में सार्वजनिक सुनवाई बुलायी गयी है जिसमें उपभोक्ता परिषद द्वारा प्रदेश के व्यापक हित में सोलर की महंगी दरों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ने का पूरा मन बना लिया है।
गौरतलब है कि विगत सप्ताह विद्युत नियामक आयोग द्वारा इन सभी 6 सोलर पावर निजी घरानों को रू. 5.21 प्रति यूनिट की दर का प्रस्ताव दिया गया था, उसी दिन से उपभोक्ता परिषद ने विरोध शुरू कर दिया था क्योंकि वर्तमान में पूरे देश में सोलर की दरें रू. 3 से 4 प्रति यूनिट के बीच है। ऐसे में उ0प्र0 में इतनी महंगी दर क्यों? नियामक आयोग द्वारा पहले ही कुछ निजी घरानों की दरें रू0 7.02 प्रति यूनिट जो बहुत अधिक है, तय की गयी थी और अब फिर आयोग द्वारा रू. 5.21 प्रति यूनिट का प्रस्ताव वर्तमान में मार्केट दर से बहुत ज्यादा है, जो किसी भी सूरत में प्रदेश के हित में नहीं है। उपभोक्ता परिषद ने पूरे मामले पर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी से यह मांग की है कि सरकार इस पूरे मामले पर हस्तक्षेप करे और उप्र में सोलर की दरों को कम कराये।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि उप्र में अब तक सोलर पावर की दरों पर जिस प्रकार से लम्बे समय से खेल हुआ और महंगी दरें तय हुई। यदि पूरे मामले की सरकार सीबीआई से जांच करा ले तो स्वतः सच्चाई का खुलासा हो जायेगा। जनहित में प्रदेश के मुख्यमंत्री जी से उपभोक्ता परिषद सोलर पावर प्रोजेक्ट की महंगी दरों के अब तक पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग करता है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि कल होने वाली सार्वजनिक सुनवाई में उप्र सरकार व पावर कार्पोरेशन का नैतिक कर्तव्य है कि वह आयोग द्वारा प्रस्तावित रू0 5.21 प्रति यूनिट दर का हर स्तर पर विरोध करे जिससे सोलर पावर की महंगी दरों पर अंकुश लग सके। बड़े दुर्भाग्य के साथ कहना पड़ रहा है कि पूर्व में भी नियामक आयोग द्वारा यदि गहन अध्ययन किया गया होता तो जो दरें अधिक तय की गयी वह बहुत आसानी से कम हो सकती थी।  जिस प्रकार से से सोलर पावर पीपीए की अवधि 12 वर्ष पर सीमित कर निजी घरानों को बड़ा फायदा दिया गया वह कहीं न कहीं अपने आप में बड़ी जांच का मामला है। जब पूरे देश में पीपीए की अवधि 25 वर्ष पर तय की गयी तो उप्र में 12 वर्ष करके निजी घरानों को क्यों लाभ दिया गया। यह अपने आप में बड़ा जांच का विषय है, जबकि आयोग द्वारा बनाये गये रेगुलेशन में भी पीपीए की अवधि 25 वर्ष ही है।

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