- बिजली कम्पनियों द्वारा लगभग 50 लाख ग्रामीण अनमीटरर्ड विद्युत उपभोक्ताओं से अधिक वसूल की गयी लगभग 950 करोड़ इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी पर मामला गरमाया
- नियामक आयोग अध्यक्ष एसके अग्रवाल ने प्रमुख सचिव ऊर्जा श्री आलोक कुमार को दो पन्ने का भेजा गया पत्र 15 दिन में अधिक वसूल की गयी ड्यूटी वापस कराने की दिशा में कार्यवाही का निर्देश अन्यथा कम्पनियों के खिलाफ होगी कार्यवाही
- ऊर्जा क्षेत्र के इतिहास में पब्लिक के मुद्दे पर आयोग अध्यक्ष को प्रमुख सचिव ऊर्जा को पत्र से मचा हड़कम्प
- उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा मामला गम्भीर मय ब्याज सहित अधिक वसूल की गयी ड्यूटी उपभोक्ताओं को करायी जाये वापस
लखनऊ, 06 फरवरी। प्रदेश के लगभग 50 लाख ग्रामीण अनमीटर्ड उपभोक्ताओं से इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी के मद में वर्ष 2012 के बाद लगभग रू0 950 करोड़ अधिक वसूल की गयी धनराशि को मय ब्याज सहित वापसी का मुद्दा आज उस समय काफी तूल पकड़ लिया जब नियामक आयोग जैसी अर्द्ध-न्यायिक स्वतंत्र संस्था के अध्यक्ष श्री एसके अग्रवाल द्वारा ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव श्री आलोक कुमार को उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार द्वारा आयोग में दाखिल जनहित प्रत्यावेदन के क्रम में एक दो पन्ने का पत्र भेजकर यह कहा गया है कि यदि 15 दिन के अन्दर अधिक वसूल की गयी धनराशि को वापस करने की दिशा में कार्यवाही न की गयी तो बिजली कम्पनियों के खिलाफ आयोग को कार्यवाही करना पड़ेगा, क्योंकि आयोग के पास लगातार विद्युत उपभोक्ता अपनी अधिक वसूल की गयी इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी वापस कराने हेतु आदेश की मांग कर रहें है।
यह पहला मौका है जब आयोग अध्यक्ष द्वारा पब्लिक के मुद्दे पर प्रमुख सचिव ऊर्जा को सीधे पत्र लिखा गया है। पत्र की भनक लगते ही पूरे ऊर्जा क्षेत्र में हंगामा मच गया, गौरतलब है कि इस मुद्दे पर उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ऊर्जा मंत्री के वार्ता के बाद ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकांत शर्मा द्वारा भी अधिक वसूल की गयी इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी वापस कराने हेतु कहा गया था। इसके बावजूद भी बिजली कम्पनियों चुप्पी साध के बैठी हुई थी।
आयोग अध्यक्ष द्वारा प्रमुख सचिव ऊर्जा को लिखे गये पत्र में यह स्पष्ट रूप से अंगित किया गया है कि उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष के 26 दिसम्बर को आयोग को सौंपे गये जनहित प्रत्यावेदन पर आयोग द्वारा पावर कार्पोरेशन के प्रबन्ध निदेशक व निदेशक वाणिज्य को अलग-अलग पत्र लिखकर इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी 5 प्रतिशत की जगह विद्युत उपभोक्ताओं से 20 प्रतिशत वसूलने को गलत मानते हुये उपभोक्ताओं से वसूल की गयी धनराशि वापस करने के लिये कहा गया। आयोग आदेश के बाद आगे से 5 प्रतिशत इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी वसूलने का आदेश जारी कर दिया गया अधिक वसूल की गयी इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी के मामले पर मामला उप्र सरकार को रिफर करने की बात कही गयी।
आयोग अध्यक्ष द्वारा प्रमुख सचिव ऊर्जा को भेजे गये पत्र में यह बात स्पष्ट रूप से कही गयी है कि बिजली कम्पनियों व पावर कार्पोरेशन द्वारा 20 प्रतिशत इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी वसूलने का आदेश वर्ष 2012 में इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी के सम्बन्ध में जारी राज्य सरकार की अधिसूचना का खुला उल्लंघन है। इसलिये बिजली कम्पनियों को अधिक वसूल की गयी इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी वापस करना होगा।
आयोग द्वारा भेजे गये पत्र में यह भी कहा गया है कि इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी जो सब्सिडी में अरजेस्ट कर दी जाती है ऐसे में बिजली कम्पनियों को वर्तमान वर्ष में उपभोक्ताओं को वापस कर उसकी भरपाई के लिये उप्र सरकार से उसके मद में धनराशि की मांग करना चाहिए। उपभोक्ताओं द्वारा अधिक वसूल की गयी इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी वापसी की मांग को बिजली कम्पनियां मना नहीं कर सकती।
उपभोक्ता परिष्द अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा यह बहुत ही गम्भीर मामला है सरकार की अधिसूचना का अर्थ का अनर्थ लगाकर ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं से लगभग 950 करोड़ अधिक वसूल की गयी इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी मय ब्याज सहित अविलम्ब बिजली कम्पनियों का वापस करना चाहिये।







