शिक्षा की गुणवत्ता और अनुसंधान की गति बढ़ाने की जरूरत है: राज्यपाल

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लखनऊ विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह सम्पन्न


छात्र अपने लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध हों – राजनाथ सिंह

लखनऊः 09 दिसम्बर, 2017: उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक ने आज लखनऊ विश्वविद्यालय के 60वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह को डीएससी की मानद् उपाधि प्रदान की तथा उपाधि प्राप्त छात्र-छात्राओं को पदक एवं उपाधि देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह, उप मुख्यमंत्री डाॅ. दिनेश शर्मा, कुलपति प्रो. एसपी सिंह, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण, कार्य परिषद एवं विद्वत परिषद के सदस्यगण, शिक्षकगण, छात्र-छात्राओं सहित अन्य विशिष्टजन भी उपस्थित थे।

राज्यपाल ने छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के कैलेन्डर में महत्वपूर्ण दिवस होता है। उपाधि प्राप्त करने के बाद किताबी पढ़ाई समाप्त होती है और जीवन के संघर्ष की शुरूआत होती है। जीवन में कड़ी स्पर्धा है। ज्ञान और बाजार की दृष्टि से दुनिया बड़ी है। शार्टकट से नहीं बल्कि कड़ी मेहनत, प्रमाणिकता और पारदर्शिता से मनुष्य अपने लक्ष्य तक पहुँच सकता है। उन्होंने कहा कि असफलता के समय आत्मपरीक्षण करें तो निश्चित रूप से स्वयं की कमी दूर होगी और सफलता प्राप्त होगी।
श्री नाईक ने कहा कि अलग-अलग विश्वविद्यालयों में दीक्षा उपदेश में माता-पिता के साथ गुरू का नाम सम्मिलित करने की अलग-अलग पद्धति हैं। दीक्षा उपदेश में एकरूपता लाने के लिए एक समिति का गठन किया गया है जिससे सभी विश्वविद्यालयों के दीक्षा उपदेश एक जैसे हों। राज्यपाल ने बताया कि उत्तर प्रदेश में 29 विश्वविद्यालयों में से 25 विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह कैलेन्डर के हिसाब से सम्पन्न होने हंै। लखनऊ विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह 17वाँ दीक्षांत समारोह है और शेष 8 विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह दिसम्बर अंत तक सम्पन्न होंगे। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह आयोजन पटरी पर आ गये हैं, शिक्षा की गुणवत्ता और अनुसंधान की गति बढ़ाने की जरूरत है।

राज्यपाल ने कहा कि इस वर्ष पदक प्राप्त करने वालों में छात्राओं का प्रतिशत 83.24 है जबकि केवल 16.76 प्रतिशत छात्रों को ही पदक प्राप्त हुए है। गत दो वर्षों में छात्राओं का प्रतिशत बढ़ता गया है। प्राप्त आकड़े जहाँ महिला सशक्तीकरण का शुभ लक्षण है तो वहीं दूसरी ओर लड़कों के लिए एक चुनौती भी है। महिलाएं हर क्षेत्र में आगे आ रही हैं। पहले केवल शिक्षण एवं नर्सिंग के क्षेत्र तक ही महिलायें सीमित थी पर आज प्रशासनिक, पुलिस, सेना आदि की सेवाओं में महिलाएं प्रतिनिधित्व कर रही हैं। चित्र बदल रहा है। उन्होंने कहा कि देश की रक्षा मंत्री भी एक महिला हैं।

दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति का कद उपाधि एवं पद से नहीं बल्कि कृतित्व से बड़ा होता है। माता-पिता एवं गुरू के सद्गुण देंखे उनमें कमी न निकालें। मनुष्य का दूसरे मनुष्य के साथ भावनाओं का रिश्ता होता है। गुरूजनों को कभी भूलना नहीं चाहिए बल्कि उन्हें पूरा आदर और सम्मान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी गुरू के महत्व को समझें। श्री राजनाथ सिंह इस अवसर पर अपने बचपन के गुरू ‘मौलवी साहब को याद करके भावुक हो गये।’

श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ज्ञान के साथ संस्कार का होना जरूरी है। ज्ञान और संस्कार का संबंध टूट जाता है तो मनुष्य विनाशकारी हो जाता है। चरित्र का जीवन में बहुत महत्व होता है इसलिए अपनी मर्यादा को समझें। रावण धनवान, ज्ञानवान तथा मृत्यु पर विजय प्राप्त करने वाला था परन्तु उसकी पूजा नहीं होती जबकि मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम की पूजा होती है। मर्यादा का पालन पूज्य बनाता है। छात्र अपने लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध हों और उत्कृष्ट बनने की कोशिश करें। उन्होंने कहा कि असंभव को संभव करने के लिए अद्वितीय बनने का प्रयास करें तथा स्थापित व्यवस्था का सम्मान करें।

इस अवसर पर राज्यपाल ने कुलपति प्रो. एसपी सिंह के एक वर्ष के  कार्यकाल पर प्रकाशित पुस्तक का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री डाॅ. दिनेश शर्मा तथा कुलपति प्रो. एसपी सिंह ने भी अपने विचार रखे।

राज्यपाल ने विभूतियों को सम्मानित किया

लखनऊः 09 दिसम्बर, 2017: उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक ने आज इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान में संस्था मीडिया प्लानर एवं अविरल ग्रुप द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पुस्तक ‘मार्वलस रिकार्ड्स बुक आॅफ इण्डिया’ का विमोचन किया तथा अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने हेतु अनेक नामचीन हस्तियों को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में महिला कल्याण एवं पयर्टन मंत्री डाॅ. रीता बहुगुणा जोशी, विधि एवं न्याय मंत्री श्री बृजेश पाठक, रिकार्डस बुक के सम्पादक डाॅ. शशिकांत तिवारी सहित अन्य विशिष्टजन भी उपस्थित थे।

राज्यपाल ने पुस्तक मार्वलस रिकार्डस बुक आॅफ इण्डिया की सराहना करते हुए कहा कि सूर्य की तरह जगत वंदनीय होने के लिए निरन्तर आगे बढ़ते रहना चाहिए। सूर्य इसलिए वंदनीय है कि वह निरन्तर चलता रहता है और दूसरों को प्रकाश व ऊर्जा देता है। समाज को कुछ देने वाली विभूतियों की विशेषता को लेकर संग्रहित पुस्तक निश्चित रूप से अभिनन्दनीय है। किताब पढ़ने का अप्रतिम आनन्द होता है। उन्होंने कहा कि दूसरे लोग किताब से निश्चित रूप से प्रेरणा प्राप्त करेंगे।

श्री नाईक ने ‘मार्वलस लीजेन्ड समिट 2017’ के आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे मुंबई के है जहाँ लोग जीविकोपार्जन के लिए दिनभर भागदौड़ करते है इसलिए वह देश की आर्थिक राजधानी है। दिल्ली देश की राजनैतिक राजधानी है तथा काशी को सांस्कृतिक राजधानी है। लखनऊ में कला, साहित्य, संगीत, नृत्य आदि के लगातार कार्यक्रम होते हैं जिससे यह कहा जा सकता है कि लखनऊ देश की कला की राजधानी है।

कार्यक्रम में राज्यपाल ने मार्वलस लाइफटाईम अचीवमेंट अवार्ड से पद्म विभूषण श्री बिन्देश्वर पाठक, पद्म श्री डाॅ. सोमा घोष, क्रिकेटर श्री चेतन शर्मा, श्री ज्ञानेन्द्र पाण्डेय, मेट्रो के प्रबंध निदेशक श्री कुमार केशव को एवं मार्वलस पर्सनालिटी आॅफ इण्डिया सम्मान से प्रो. मनोज दीक्षित, डाॅ. मनोज पटारिया, सुश्री शाईस्ता अम्बर, डाॅ. उर्वशी साहनी, सुश्री पल्लवी फौजदार, श्री राजीव खण्डेलवाल, श्री मनोज मुंतसिर, श्री रजनीश दुग्गल, सुश्री मीनाक्षी दीक्षित, श्री पंकज गाहिल, श्री राजीव निगम, श्री एसकेडी सिंह, सुश्री नीलू मिश्रा, डाॅ. संकल्प जैन, श्री गौरव गुप्ता को तथा मार्वलस पर्सनालिटी आॅफ इण्डिया (आजीवन सदस्य) के रूप में डाॅ. भास्कर शर्मा, डाॅ. मोनिका मिश्रा, डाॅ. एलएस सरकार, श्री राधाकांत चैबे, सुश्री अर्चना शुक्ला, सुश्री कविता यादव, सुश्री नाजिया नफीस, श्री रंजन पाण्डेय, श्री नीलाम्बर कौशिक, श्री विजय भारत, श्री पुनीत कुमार पाण्डेय को सम्मानित किया।
इस अवसर पर मंत्री श्री बृजेश पाठक एवं मंत्री डाॅ. रीता बहुगुणा जोशी ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

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