निजी घरानों को पिछले दरवाजे से पहुंचाया गया फायदा
- उपभोक्ता परिषद के विरोध के बाद आयेाग ने अपनी ही प्रस्तावित दर रू0 5.21 प्रतियूनिट में 14 पैसे प्रतियूनिट की कटौती कर रू0 5.07 प्रतियूनिट किया अनुमोदित जिसे उपभोक्ता परिषद ने पुनः कहा अधिक
- सुनवाई के 14 दिन बाद भी अधिक दर पर पावर कार्पोरेशन ने नहीं की कोई आपत्ति क्या यह इन्वेसर्ट मीट का बड़ा दबाव तो नहीं सुनवाई में अधिक दर का किया विरोध फिर लिखित आपत्ति क्यों नहीं की?
लखनऊ, 13 फरवरी। सोलर पावर प्रोजेक्ट लगाने वाले निजी घरानों मेसर्स अडानी, मेसर्स सहसधारा, मेसर्स पीनैकल, मेसर्स टेकनिकल एसोसिएट, मेसर्स अवध रबड व मेसर्स सुधाकर इन्फ्राट्रक द्वारा दाखिल याचिकाओं जिसपर 31 जनवरी को जन सुनवाई हुई थी और फैसला रिजर्व था आज उप्र विद्युत नियामक आयोग, अध्यक्ष एसके अग्रवाल द्वारा उस पर आयोग का फैसला सुना दिया गया।
गौरतलब है कि आयोग द्वारा सुनाये गये फैसले में आयोग ने पहले दर रू0 5.21 प्रतियूनिट प्रस्तावित की थी उस पर उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा के विरोध के बाद अब उसमें 14 पैसे प्रतियूनिट की कटौती करते हुये उसे रू0 5.07 प्रति यूनिट अनुमोदित 12 वर्ष के लिये किया गया है और वहीं पहले आयोग द्वारा जो कैपिटल कास्ट रू0 4.80 करोड़ प्रतिमेगा वाट प्रस्तावित की गयी थी उसमें 15 लाख प्रति मेगा वाट की कटौती कर रू0 4.65 करोड़ प्रतिमेगा वाट अनुमोदित किया।
आयोग द्वारा जारी आदेश में यह साफ दिखा कि यदि पावर कार्पोरेशन द्वारा आयोग द्वारा प्रस्तावित दर पर अपना लिखित जवाब दाखिल कर दिया गया होता तो आज आयोग का आदेश कुछ और होता और निश्चित तौर पर आयोग द्वारा तय दर रू0 5.07 प्रतियूनिट कहीं नीचे जाती । सबसे बड़ो चौकाने वाला सवाल है कि जनसुनवाई के 14 दिन बाद भी पावर कार्पोरेशन द्वारा आयोग की प्रस्तावित अधिक दर पर कोई भी लिखित आपत्ति न दाखिल करने का सीधा तात्पर्य निजी घरानों को पिछले दरवाजे से फायदा पहुँचाना है अब वास्तव में यदि कार्पोरेशन इस अधिक दर का विरोध करना चाहता है तो वह पुनर्विचार याचिका दाखिल करे।
आयोग द्वारा पूर्व में सोलर की दर रू0 7.02 प्रतियूनिट तय की गयी थी जिसके बाद से ही उपभोक्ता परिषद दरों में कमी के लिये लड़ाई लड़ रहा था। आदेश आते ही पावर कार्पोरेशन की चुप्पी पर हंगामा खड़ा हो गया उपभोक्ता परिषद पुनः जोरदार तरीके से अपना विरोध शुरू कर दिया। आयोग ने अपने आदेश में यह दर्ज भी किया है कि रू0 5.21 प्रतियूनिट पर कार्पोरेशन प्रबन्धन ने कुछ नहीं कहा।
आयोग द्वारा सुनाये गये फैसले में उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा द्वारा की गयी आपत्तियों पर बिन्दुवार आयोग द्वारा अपना विशलेषण आदेश में दर्ज करते हुये करते हुये सोलर की दरों में 14 पैसे प्रतियूटि की अपने द्वारा ही प्र्रस्तावित दर में कटौती की गयी वहीं उपभोक्ता परिषद लगातार इस बात पर अड़ा था कि वर्तमान में सोलर पावर की दरें रू0 3 से 4 रू0 प्रतियूनिट के बीच पूरे देश में आ रही है ऐसे में आयोग द्वारा प्रस्तावित दर बहुत अधिक है। वास्तव में पावर कार्पोरेशन ने दर के मामले में उपभोक्ता परिषद का साथ दिया होता तो आज यह आदेश ऐतिहासिक होता।
आयोग आदेश जारी होते ही उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग अध्यक्ष एसके अग्रवाल से मुलाकात कर अपना विरोध दर्ज कराते हुये कहा कि आयोग द्वारा तय दर रू0 5.07 प्रतियूनिट भी बहुत अधिक है वास्तव सही तरीके से और गहन अध्ययन किया गया होता तो यह दरें बहुत कम होती उपभोक्ता परिषद ने पुनः आयोग अध्यक्ष के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा किया कि आयोग का अधिकार विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 63 के तहत एडाप्सन आफ टैरिफ का था लेकिन आयोग आज जो फैसला दिया गया है उसमें आयोग विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 62 में घुस कर बिडिंग रूट के प्रकरण में टैरिफ निर्धारण का कार्य किया है जो कानूनन गलत है। जिस पर आयोग अध्यक्ष द्वारा पुनः यह बात दोहराई गयी कि कार्पोरेशन ने दर के मामले में कोई लिखित आपत्ति नहीं की ऐसे में आयोग के पास इस आदेश के सिवा कोई दुसरा रास्ता नहीं था। उपभोक्ता परिषद द्वारा सौपे गये साक्ष्यों के आधार पर आयोग ने स्वतः अपनी प्रस्तावित दर में 14 पैसे प्रतियूनिट की कमी है।
उपभोक्ता परिषद ने पावर कारपोरेशन पर बड़ा सवाल खड़ा करते हुये कहा कि इन सभी 6 याचिकाओं की सुनवाई में पावर कार्पोरेशन द्वारा यह कहा गया था कि पावर कारपोरेशन को मार्केट में रूपया 2.45 प्रति यूनिट से रूपया 2.52 प्रति यूनिट के बीच बिजली उपलब्ध है तो सोलर की इतनी मंहगी बिजली पावर कारपोरेशन क्यों लेगा? लेकिन 14 दिन बाद बीत जाने के बाद भी पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन द्वारा दर के मामले में अपना लिखित आपत्ति आयोग को दाखिल न करना ऊर्जा सेक्टर के खेमों में बड़ी चर्चा का विषय है लोग यह भी कह रहें है कि इन्वेस्टर्स मीट के पहले पावर कार्पोरेशन निजी घरानों का विरोध नहीं करना चाहता लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि महंगी दर का खामियाजा प्रदेश का उपभोक्ता भुगतेगा उसका क्या होगा? जिस प्रकार से उपभोक्ता परिषद ने कड़ा विरोध करके 14 पैसे प्रतियूनिट की दरों में कमी कराया वह और भी कम हो सकता था लेकिन पावर कार्पोरेशन साथ देता तो।







