सोलर पावर की सार्वजनिक सुनवायी रही काफी हंगामेदार, निर्णय सुरक्षित

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  • उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने आयोग द्वारा प्रस्तावित रूपया 5.21 प्रति यूनिट की दर पर सवाल खडा करते हुये कहा आयेाग को नियमानुसार पुनः कराना चाहिये रिवर्स बिडिंग
  • पावर कारपोरेशन ने कहा सभी 6 निजी घरानों के टर्मिनेशन पर आज भी पावर कारपोरेशन अडिग, जब पावर कारपोरेशन को मिल रही है सस्ती बिजली तो मंहगी सोलर की दर पर क्यों करे विचार
लखनऊ, 31 जनवरी। सोलर पावर प्रोजेक्ट लगाने वाले निजी घरानों मेसर्स अडानी, मेसर्स सहसधारा, मेसर्स पीनैकल, मेसर्स टेकनिकल एसोसिएट, मेसर्स अवध रबड व मेसर्स सुधाकर इन्फ्राट्रक द्वारा दाखिल याचिकाओं पर आज उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा आयोजित सार्वजनिक सुनवाई काफी हंगामेदार रही। आयोग अध्यक्ष एस के अग्रवाल की अध्यक्षता में शुरू हुयी सुनवायी में नियामक आयोग सचिव संजय श्रीवास्तव संयुक्त निदेशक अभिषेक श्रीवास्तव सहित पावर कारपोरेशन व निजी घरानों की ओर से मा. हाई कोर्ट के दर्जनों अधिवक्ता उपस्थित थें।
आज पहली बार ऐसा रहा कि जब पावर कारपोरेशन उपभोक्ता परिषद के साथ पूरी तरह सुनवायी में खडा रहा और सोलर की मंहगी बिजली दर के खिलाफ आवाज बुलन्द की। जिस पर उपभोक्ता परिषद द्वारा भरी सुनवायी में पावर कारपोरेशन की इस कार्यवाही का समर्थन करते हुये उसे उपभोक्ता हित की बात करने के लिये बधाई भी दी गयी। उस समय अजब स्थित खडी हो गयी जब पावर कारपोरेशन के मुख्य अभियन्ता, पीपीए ने कह दिया कि पावर कारपोरेशन इन सभी 6 बिडर के निरस्तीकरण नोटिस पर आज भी कायम है। आगे पूरा मामला पावर कारपोरेशन प्रबन्धन के सामने रख दिया गया है जो निर्णय होगा उससे आयेाग को अवगत कराया जायेगा। आयोग ने निर्णय किया सुरक्षित।
सुनवायी शुरू होते ही प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की तरफ से अपना पक्ष रखते हुये उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग द्वारा प्रस्तावित रूपया 5.21 प्रति यूनिट सोलर पावर की दर पर सवाल खडा करते हुये कहा कि आयोग का अधिकार विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 63 के तहत एडाप्सन आफ टैरिफ का है। बिडिंग रूट के तहत आयोग द्वारा किस प्रकार से विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 62 में घुस कर रूपया 5.21 प्रति यूनिट प्रस्तावित किया गया है वह भी बहुत ज्यादा।
उपभोक्ता परिषद ने देश के अनेकों नियामक आयोगों का आदेश आयोग को सौंपते हुये कहा कि आयोग द्वारा 4.80 करोड प्रति मेगावाट की जो कैपिटल कास्ट तय की गयी है वह बहुत अधिक है। आयेाग को अपने तरीके से सोलर की दर रूपया 5.21 प्रस्तावित करना उचित नही है। उपभोक्ता परिषद द्वारा इसी प्रकार के तमिलनाडू राज्य के एक मामले में तमिलनाडू नियामक आयोग का आदेश सौंपते हुये कहा कि तमिलनाडू की भाॅंति आयोग को इन सभी 6 बिडर से रिवर्स बिडिंग कराना चाहिये और साथ ही रूपया 4 प्रति यूनिट का एक सीलिंग प्राइज तय कर आगे की रिवर्स बिडिंग पर निकली दर पर विचार करना चाहिये।
स्वतः सोलर की दरें रूपया 3 प्रति यूनिट से रूपया 4 प्रति यूनिट के बीच आ जायेगी। आयोग द्वारा पूर्व में भी रूपया 7.02 प्रति यूनिट की जो दर तय की गयी वह बहुत अधिक है। उपभोक्ता परिषद द्वारा पूरे देश के लगभग 47 बिडिंग के मामले मे निकली दरों का विश्लेषण भी राज्यवार आयेाग के सामने पेश किया और आयेाग से यह सिफारिश की कि पूरे मामले की रिवर्स बिडिंग करायी जाये।
सुनवायी में आज उस समय काफी हंगामा हो गया जब पावर कारपोरेशन के मुख्य अभियन्ता पीपीए श्री बी के अस्थाना ने आयोग के सामने दो टूक कह दिया कि पावर कारपोरेशन इन सभी 6 बिडर के ट्ररमिनेशन नोटिस पर अभी भी कायम है जब पावर कारपोरेशन को मार्केट में रूपया 2.45 प्रति यूनिट से रूपया 2.52 प्रति यूनिट के बीच बिजली उपलब्ध है तो सोलर की इतनी मंहगी बिजली पावर कारपोरेशन क्यों लेगा?
जिसपर उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने आयोग के सामने यह शिफारिश रखी कि जब पावर कारपोरशन सोलर की मंहगी बिजली खरीदने को तैयार ही नही है तो आयोग क्यों मंहगी बिजली खरीदवाने के लिये दबाव डाल रहा है। निजी घरानों की तरफ से उनका पक्ष रखते हुये अनेकों वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने आयोग से कहा कि पूर्व में सोलर पावर लगाने वाले निजी घरानों को जो रूपया 7.02 प्रति यूनिट का रेट दिया गया है वही हम सभी को भी दिया जाये। क्योंकि निजी घरानों ने अपना बहुत सा काम पूरा कर लिया है।
नियामक आयेाग अध्यक्ष ने पूरे मामले की सुनवायी पूरी होने के बाद निर्णय को सुरक्षित कर लिया है।

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