ऊर्जा बजट को उपभोक्ता परिषद ने बताया नाकाफी, बोले इससे नहीं चलेगा काम

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  • प्रदेश के बजट में ऊर्जा क्षेत्र के लिये वर्तमान परिवेश में 29 हजार 883 करोड़ के बजट को उपभोक्ता परिषद ने बताया नाकाफी, कहा इससे नहीं चलेगा काम।
  • सरकारी विभागों पर कुल बकाया 10 हजार 756 करोड़ की सम्बन्धित विभागों के बजट से कटौती कर सीधे पावर कार्पोरेशन के बजट में प्राविधानित करने की थी जरूरत।
  • सौर ऊर्जा में प्रस्तावित स्थापित क्षमता का 75 प्रतिशत सार्वजनिक क्षेत्र में निवेश का प्राविधान होता ज्यादा लाभकारी, निजी घरानों का होगा बोल-बाला।
लखनऊ, 16 फरवरी। उप्र सरकार द्वारा वर्ष 2018-19 का 4 लाख 28 हजार 384 करोड़ का बजट पेश किया गया, उसमें वर्ष 2018-19 में ऊर्जा क्षेत्र की योजनाओं के लिये 29 हजार 883 करोड़ रू. का बजट में जो व्यवस्था की गयी है। वह वर्तमान परिस्थितियों में बहुत ही कम है। जहां प्रदेश में बड़े पैमाने पर सौभाग्या योजना के तहत लगभग 1 करोड़ 50 लाख नये विद्युत उपभोक्ताओं को संयोजन दिया जाना है। वहीं सबसे बड़ी बजटीय समस्या आने वाले समय में यह भी सामने आयेगी कि सभी को उच्च गुणवत्ता की बिजली देने के लिये सिस्टम का पुनर्गठन करना होगा।
उप्र के किसानों को वर्तमान बजट में बहुत ही सम्भावनाएं थीं कि विगत दिनों सरकार के इशारे पर उनके ग्रामीण घरों व ट्यूबवेलों की दरों में लगभग 50 से 150 प्रतिशत का इजाफा कराया गया है। उसके मद्देनजर सरकार किसानों को राहत देने के लिये बजट में अतिरिक्त सब्सिडी घोषित करती तो ज्यादा उचित होता। उप्र के ग्रामीण विद्युत उपभोक्ता जो सौभाग्या योजना के तहत फ्री बिजली कनेक्शन पा रहे हैं। आने वाले समय में उनकी माली हालत ऐसी नहीं है कि वह वर्तमान लागू बिजली दर पर भुगतान कर पायें। उनके लिये भी सरकार द्वारा बजट में नया प्राविधान अतिरिक्त सब्सिडी का किया जाना आवश्यक था, जो नहीं किया गया। सार्वजनिक क्षेत्र में उत्पादन गृह लगाने की दिशा में सरकार द्वारा कोई भी उचित प्राविधान नहीं किया गया।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौसिंल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश का ऊर्जा क्षेत्र काफी विषम परिस्थितियों में भारी घाटे से गुजर रहा है। उसका एक मुख्य कारण यह भी है कि सरकारी विभाग बड़े पैमाने पर बिजली खर्च तो करते हैं लेकिन अपना भुगतान नहीं करते, उसी के चलते 31 मार्च, 2018 तक सरकारी विभागों पर रू. 10 हजार 756 करोड़ का बकाया है। वास्तव में इस बार सभी को यह उम्मीद थी कि सरकार जिस भी विभाग पर सरकारी बकाया है, उसके बजट का उतना अंश काटकर वह पावर कार्पोरेशन को सीधे बजटीय प्राविधान के तहत उपलब्ध कराती। लेकिन बजट में इस प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं की गयी, जिससे आने वाले समय में प्रदेश के ऊर्जा सेक्टर को सुचारू रूप से चलाने में काफी कठिनाई आयेगी।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि सरकार ने बजट में सौर ऊर्जा नीति 2017 में निजी सहभागिता से 2022 तक कुल 10 हजार 700 मेगावाट क्षमता की सौर विद्युत परियोजनाएं स्थापित करने का जो लक्ष्य रखा है, उससे आने वाले समय में निजी घरानों का बोल-बाला बढ़ेगा। उचित होता सरकार कुल प्रस्तावित क्षमता का लगभग 75 प्रतिशत सरकारी क्षेत्र में लगवाती, उससे कहीं न कहीं प्रदेश व उपभोक्ताओं का फायदा होता।
कुल मिलाकर यह कहना उचित होगा कि प्रदेश के पावर सेक्टर के लिये वर्तमान परिवेश में जो ऊर्जा का बजट प्रस्तावित किया गया है, वह उचित नहीं है। उसमें लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी और होती तो ज्यादा उचित होता।