उपभोक्ता परिषद का दावा: नियामक आयोग ने दबाव में बढ़ायी बिजली दरें

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आयोग ने कहा सरकार ने बिजली कम्पनियों को 2017-18 तक नहीं दी अतिरिक्त 15089 करोड़ की सब्सिडी अगर उपभोक्ताओं के रू0 13337 करोड़ का लाख उपभोक्ताओं को दिया जाता तो बिजली कम्पनियां आर्थिक संकट में पड़ जाती इसलिये इसको आगे दिया जायेगा

लखनऊ, 04 सितम्बर 2019:  उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा गुपचुप तरीके से बढ़ायी गयी बिजली दरों में पावर कार्पोरेशन व सरकार के दबाव का उपभोक्ता परिषद ने खुलासा करते हुए कहा है कि टैरिफ प्रस्ताव के समय से ही उपभोक्ता परिषद ने इस बात को लेकर अनेकों विधिक साक्ष्य पेश किये थे कि वर्ष 2016-17 तक उदय स्कीम के तहत उपभोक्ताओं का बिजली कम्पनियों पर 11852 करोड़ रूपया निकल रहा है। अंततः कल जारी टैरिफ आदेश में विद्युत नियामक आयोग ने सभी पक्षों की दलीलों के बाद यह मान लिया कि उपभोक्ताओं का रू0 10793 करोड़ बिजली कम्पनियों पर निकल रहा है और साथ जब ट्रूअप 2017-18 के आंकड़ों का मिलान किया तो यह राशि बढ़कर रू0 13337 करोड़ हो गयी, यानि कि वर्ष 2017-18 तक आयोग द्वारा जारी टैरिफ के अनुसार प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं का बिजली कम्पनियों पर कुल रू0 13337 करोड़ निकल रहा है।

उन्होंने कहा कि फिर ऐसे में विद्युत नियामक आयोग ने बिजली दरों में इजाफा क्यों किया और उपभोक्ताओं की कम्पनियों पर निकल रही इस हजारों करोड़ की राशि को आगामी वर्षों में राहत देने की बात की। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है जब जब बिजली कम्पनियों का उपभोक्ता पर निकला तब तब बिजली दर बढ़ी। फिर ऐसे में अब जब उपभोक्ताओं का पैसा निकल रहा है तो दरों में कमी क्यों नहीं की गयी? आयोग को यह भी पता है कि रेगुलेटरी सरचार्ज 4.28 प्रति समाप्त तो हो गया है लेकिन वर्ष 2016-17 से अब तक जो इस मद में बिजली कम्पनियों ने हजारों करोड़ रूपया अतिरिक्त वसूला है, उसे भी उपभोक्ताओं को वापस मिलना है। सब मिलाकर नियामक आयोग अधिनियम के प्राविधानों के तहत यदि उपभोक्ताओं के साथ खड़ा होता तो आज दरों में भारी कमी होती।

उपभोक्ता परिषद ने उप्र सरकार से यह मांग उठायी है कि वह पूरे मामले पर हस्तक्षेप करते हुए प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं पर बिजली कम्पनियों के निकल रहे हजारों करोड़ रूपये के एवज में घरेलू शहरी ग्रामीण व किसानों की बिजली दरों में कमी कराये। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा मा0 ऊर्जा मंत्री जी से कम बात हुई है जल्द ही उनसे मुलाकात की जायेगी और उसके बाद उपभोक्ता परिषद विद्युत नियामक आयोग में रिव्यू याचिका दाखिल करेगा और तब भी बात न बनी तो आन्दोलन का रास्ता अपनायेगा।

उप्र राज्य उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा एक दूसरा सबसे बड़ा चौकाने वाला सवाल यह है कि नियामक आयोग ने टैरिफ आदेश में स्वतः टैरिफ बढ़ोत्तरी से जो अतिरिक्त राजस्व अनुमोदित किया वह रू0 3593 करोड़ है और वहीं दूसरी तरफ टैरिफ बढ़ोत्तरी के पश्चात् बिजली कम्पनियों को जो अतिरिक्त राज्य मिलेगा वह रू0 3872 करोड़ है। यानि कि इतिहास में पहली बार रू0 279 करोड़ राजस्व अधिक प्राप्त वसूलने के लिये बिजली कम्पनियों को अनुमति दी गयी, जबकि इस राशि के एवज में प्रदेश के किसानों की बिजली दरों में बढ़ोत्तरी रोकी जा सकती थी। जब बिजली कम्पनियां आरओई 16 प्रतिशत वसूल रही हैं, फिर ऐसे में लगभग रू0 279 करोड़ का लाभ देकर उपभोक्ताओं की टैरिफ बढ़वाना आयोग के आदेश पर स्वतः सवाल उठा रहा है, जिस पर आयोग को विचार करना होगा।

आगे एक सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि आयोग ने अपने आदेश में यह भी लिखा है कि बिजली कम्पनियों को वर्ष 2017-18 तक उ0प्र0 सरकार से एडिशनल सब्सिडी रू0 15089 करोड़ मिलना है, जिसे सरकार ने पावर कार्पोरेशन को भुगतान नहीं किया है। जिससे बिजली कम्पनियों की परिचालन व नकदी में गिरावट आ रही है। इसीलिये प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं का जो बिजली कम्पनियों पर रू0 13337 करोड़ रूपया निकल रहा है, उसका लाभ उपभोक्ताओं को इसलिये नहीं दिया जा रहा है कि वितरण कम्पनियों के लिये आर्थिक संकट खड़ा हो जायेगा और भविष्य में इस राशि से भारी वृद्धि को रोका जायेगा। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि सरकार की अतिरिक्त सब्सिडी सरकार नहीं देगी तो क्या उसका खामियाजा जनता भुगतेगी।

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने सरकार से यह भी सीधा सवाल किया कि बिजली कम्पनियों का सरकारी विभागों का लगभग 11 हजार करोड़ बकाया है, उसे सरकार क्यों नहीं दिलाती?

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