अंतरराष्ट्रीय श्री पुष्कर मेला 2025: 514 बीघा में फैला श्री पुष्कर पशु मेला, मेले को देखने के लिए देश-विदेश के लोग आए हुए है, मेला परवान पर चढ़ा हुआ है, यह मेला कार्तिक पूर्णिमा 05 नवम्बर 2025 को सम्मापन होगा.
पुष्कर (राजस्थान) : कार्तिक मास की पूर्णिमा पर आधारित अंतरराष्ट्रीय श्री पुष्कर मेला 2025 पूरे शबाब पर है। 514 बीघा (लगभग 200 एकड़) में फैला यह पशु मेला ऊंटों, घोड़ों, भेड़-बकरियों और मवेशियों का विशाल बाजार बन चुका है, जहां देश-विदेश से लाखों पर्यटक और व्यापारी उमड़ पड़े हैं। मेला 30 अक्टूबर से शुरू होकर 5 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा पर समापन होगा, जब पुष्कर सरोवर में पवित्र स्नान और महाआरती का आयोजन होगा। यह मेला न केवल पशु व्यापार का केंद्र है, बल्कि राजस्थानी संस्कृति, लोक नृत्य और रंग-बिरंगे बाजारों का जीवंत चित्रण भी करता है।

ऊंट सज्जा और प्रतियोगिताओं का जलवा: मेला परवान परमेले का मुख्य आकर्षण ऊंट सज्जा प्रतियोगिता है, जहां ऊंटों को घाघरा-चोली, आईने और रंग-बिरंगी सजावट से सजाकर परेड कराई जाती है। इस बार 30,000 से अधिक ऊंट और पशु लाए गए हैं, जिनकी खरीद-बिक्री के साथ-साथ ऊंट नृत्य, दूध निकालने की प्रतियोगिता और लॉन्ग मस्टैश कॉम्पिटिशन हो रही हैं। स्थानीय कलाकार कालबेलिया नृत्य, मांडणा चित्रकला और लोक संगीत से पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं। शाम को मेला मैदान में ‘वॉयस ऑफ पुष्कर’ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रहती है।
आकर्षण : पुष्कर मेले में ‘शाहबाज’ नामक 15 करोड़ रुपये का घोड़ा और 23 करोड़ रुपये का भैंसा ‘अनमोल’ लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। पुष्कर का यह मेला भारत के प्रमुख पशु मेलों में से एक माना जाता है। इनमें से कई पशुओं की कीमत रिकॉर्ड तोड़ होती है।
आकर्षण सैंड आर्ट का : पुष्कर मेले में इस बार सैंड आर्ट बेहद चर्चित है। पुष्कर मेले में बनी बालू रेत की कलाकृतियाँ बेहद मनमोहक हैं। बारिश में @sandartistajay अजय भाई की टीम को इन्हें तिरपाल से ढकते देख मन उदास था कि कितनी मेहनत लगी है इन्हें बनाने में।
पुष्कर मेले में एक और वायरल हुई मोनालिसा…!! कुम्भ मेले के बाद अब पुष्कर मेले में कालबेलिया समाज की सुमन की फोटो और वीडियो बनाने को लोग लालायित दिखें।
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राजस्थान पर्यटन विभाग के अनुसार, यह मेला 100 वर्ष पुरानी परंपरा का प्रतीक है, जो भगवान ब्रह्मा के पुष्कर में तपस्या से जुड़ा है। पर्यटकों के लिए हॉट एयर बैलून राइड, कैमल सफारी और बॉडी पेंटिंग स्टॉल्स भी उपलब्ध हैं। बाजारों में चांदी के आभूषण, लेहरीया साड़ियां, मसाले और ऊंट की सवारी वाली स्मृति चिन्ह बिक रहे हैं।
पर्यटकों के दो संस्करण: स्थानीय नजरिया vs विदेशी नजरिया
मेले का आकर्षण पर्यटकों के लिए अलग-अलग रूपों में झलकता है। यहां दो प्रमुख संस्करण पेश हैं। एक स्थानीय राजस्थानी पर्यटक का अनुभव, जो परंपरा से जुड़ा है, और दूसरा अंतरराष्ट्रीय पर्यटक का, जो साहसिक और सांस्कृतिक खोज पर केंद्रित है।
स्थानीय पर्यटक का संस्करण (राजस्थानी परिवार की नजर से):

जयपुर से आए राजेश मीणा परिवार के साथ मेले में पहुंचे। “यह मेला हमारी जड़ों से जुड़ा है। ऊंट खरीदने के साथ-साथ लोक नृत्य देखना और पुष्कर झील में स्नान करना धार्मिक अनुभव है। बाजार से मसाले और चूड़ियां खरीदीं, लेकिन भीड़ में सावधानी बरतनी पड़ती है। शाम की आरती में शांति मिलती है।” राजेश बताते हैं कि स्थानीय लोग मेले को व्यापार और सामुदायिक मिलन के रूप में देखते हैं, जहां पारंपरिक खेल जैसे गिल्ली डंडा और कबड्डी मैच परिवारों को एकजुट करते हैं। उनके लिए टिप: सुबह जल्दी पहुंचें, पारंपरिक राजस्थानी भोजन जैसे दाल बाटी चूरमा का स्वाद लें, और मेला मैदान के आसपास के गांवों में होमस्टे चुनें।
अंतरराष्ट्रीय पर्यटक का संस्करण (विदेशी साहसिक जोड़ी की नजर से):
फ्रांस से आईं एमा और टॉम पहली बार पुष्कर मेला देखने आए। “यह रंगीन कार्निवल जैसा है! ऊंटों की सजावट देखकर हैरान रह गए। हमने हॉट एयर बैलून से ऊंटों की परेड देखी और लोक डांस में शामिल हुए। लेकिन शाकाहारी भोजन और शराब निषेध होने से पहले ही सूचित कर लिया।” वे बताते हैं कि विदेशी पर्यटक मेले को फोटोग्राफी और सांस्कृतिक इमर्शन के लिए पसंद करते हैं। टिप्स: सनस्क्रीन और आरामदायक जूते लाएं, कैमल सफारी बुक करें, और इंटरनेशनल ब्राइड-ग्रूम कॉम्पिटिशन में हिस्सा लें। वे सलाह देते हैं कि जयपुर एयरपोर्ट से 3 घंटे की ड्राइव से पहुंचें और टेंटेड कैंप्स में रहें।
यात्रा टिप्स : मेले में पहुंचने के लिए अजमेर रेलवे स्टेशन (15 किमी) या जयपुर एयरपोर्ट (146 किमी) सबसे सुविधाजनक हैं। एंट्री फ्री है, लेकिन पार्किंग और राइड्स के लिए शुल्क लग सकता है। 5 नवंबर को समापन पर फायरवर्क्स और ग्रुप डांस का आयोजन होगा। पर्यटन विशेषज्ञ कहते हैं, “यह मेला राजस्थान की आत्मा है पर्यटक यहां संस्कृति को जीते हैं।”






