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    Home»ब्लॉग»Current Issues

    शाह से मुलाकात का सकारात्मक परिणाम

    By March 22, 2018Updated:March 22, 2018 Current Issues 1 Comment5 Mins Read
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    Post Views: 565
    डॉ. दिलीप अग्निहोत्री
    उत्तर प्रदेश सरकार में एक मुखर मंत्री के तेवर नरम पड़े। भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री से मुलाकात के बाद उनमें यह परिवर्तन आया। इसके बाद उन्होंने राज्यसभा के लिए भाजपा उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान किया। यह बदलाव स्थाई है, तो इसका स्वागत होना चाहिए। क्योंकि उत्तर प्रदेश का जनादेश इसी के लिए है। यदि पुनः सार्वजनिक तौर पर आरोप लगाए गए तो इसे अनुचित ही कहा जायेगा। क्योकि यह गठबन्धन धर्म, संसदीय संवैधानिक व्यवस्था और जनादेश तीनों का एक साथ उल्लंघन होगा।
    मंत्री जी ने अपनी ही सरकार पर जिस प्रकार हमला किया, उसे किसी रूप में मर्यादित नहीं माना जा सकता। वह एक महान हिन्दू राजा के नाम से बनी राजनीतिक पार्टी के संस्थापक मुखिया है। पिछले कुछ समय से वह उस सरकार को विफल बता रहे है, जिसकी कैबिनेट में वह खुद शामिल है।
     हद तो तब हुई, जब उत्तर प्रदेश सरकार अपने कार्यकाल के एक वर्ष पूरा होने के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित कर रही थी, दूसरी तरफ उस सरकार के ये मंत्री उस पर बाकायदा पत्रकार वार्ता के माध्यम से हमला बोल रहे थे। मतलब उन्होंने एक दिन भी धैर्य रखना मुनासिब नहीं रखा। वह बोले के योगी सरकार गरीबों के आवास, स्वास्थ ,शौचालय, राशन कार्ड, शिक्षा के मुद्दे पर पूरी तरह फ़ेल हुई है। मंत्री जी यहीं तक नहीं रुके। वह सरकार के शिक्षक की भूमिका में आ गए। सरकार को गरीबों के मुद्दे पर दस में से शून्य नम्बर भी दे दिए। वैसे मंत्री जी ने यह नहीं बताया कि उन्होंने अपने विभाग को कितने नम्बर दिए। इससे इतना तो जाहिर हुआ कि मंत्री जी अपने दोनों हाँथ में लड्डू रखना चाहते थे। वह सरकार के अंग भी थे और आने समर्थकों के बीच बीच क्रांतिकारी भी दिखना चाहते थे, जो गरीबों के नाम पर अपनी ही सरकार पर हमला बोल सकता है। लेकिन ऐसा करते समय भूल गए कि वह एक साथ कई मर्यादायों का अतिक्रमण कर रहे है।
    देश के प्रत्येक नागरिक को राजनीतिक अधिकार दिया है। शांतिपूर्ण ढंग से वह राजनीतिक गतिविधियों में शामिल हो सकता है, उसके अनुरूप विचारों की अभिव्यक्ति कर सकता है। बात यही तक सीमित होती तो आपत्ति की कोई बात नहीं थी। विपक्ष भी ऐसे आरोप लगा रहा है। उसपर आपत्ति नहीं होती लेकिन गठबन्धन धर्म की मर्यादा होती है। इसमे असहमति दर्ज कराने का एक तरीका होता है। एक सीमा तक धैर्य का पालन भी करना होता है। एक वर्ष में कोई सरकार सब कुछ ठीक नहीं कर सकती। इसी में जनादेश की मर्यादा भी शामिल है। मंत्री जी ने बसपा से अलग होने के बाद तरह वर्ष पहले अपनी अलग पार्टी बनाई थी लेकिन  भाजपा के साथ मिल कर चुनाव लड़ने के बाद ही उनकी पार्टी को विधानसभा में जगह मिली। भाजपा ने उन्हें आठ सीटों पर चुनाव लड़ाया था। इसमें चार सीट उन्हें मिली। मंत्री जी को चुनाव का यह विश्लेषण भी याद रखना चाहिए। भाजपा ने उन्हें कैबिनेट में जगह दी। पूरा महत्व दिया। एक वर्ष पूरे होने पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेन्द्रनाथ पांडेय ने उनसे स्वयं कहा। नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना कार्यक्रम में साथ ले चलने को उनके घर गए। लेकिन उनके तेवर कठोर बने रहे। निश्चित ही कुछ नाराजगी हो सकती है। ऐसा नहीं कि उच्च पदों पर आसीन लोग परेशानियों से मुक्त होते है। लेकिन इसके लिए उचित फोरम पर बात रखनी चाहिए। इससे ही समाधान हो सकता है।
    इसके अलावा संसदीय शासन व्यवस्था की भी मर्यादा होती है। भारतीय संविधान ने इसी को अपनाया है। इस व्यवस्था में  मंत्रिपरिषद सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना से कार्य करती है। यदि विधायिका एक मंत्री के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर दे तो पूरी मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना होता है। यहां तो एक मंत्री पूरी सरकार की निंदा कर रहा था। यह संसदीय शासन की मर्यादा का उल्लंघन था।
    मंत्री ने जो आरोप लगाए, उनका जबाब मुख्यमंत्री के भाषण में समाहित था। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार पर गरीब, पिछड़ा, दलित वीरोधी का आरोप लगाने वालों को तथ्यों व प्रमाणों पर ध्यान देना चाहिए।
    केवल एक वर्ष में ग्यारह लाख गरीबो को आवास दिए गए। इसमे पिछड़े, दलित गरीब शामिल रहे है। जबकि पिछली सरकार ने तीन वर्ष तक प्रधानमंत्री आवास योजना पर कुछ नहीं किया था। इकतालीस लाख शौचालय बनाये।
    तीस लाख फर्जी राशन कार्ड निरस्त किये। छत्तीस लाख गरीबों को राशन कार्ड दिए। एक लाख गरीबों को अंत्योदय राशन कार्ड दिए। तेरह हजार राशन की दुकानों पर पीओएस मशीन लगाई गई।उपभोक्ता अब कहीं से भी राशन ले सकते है।  इन व्यवस्थाओं से पैतीस हजार करोड़ रुपये का घोटाला प्रतिमहिने रोका है। नकल विहीन परीक्षा कराई। पिछली सरकार के मुकाबले पांच गुना अधिक गेंहू, धान खरीदा। किसानों के खाते में धन भेजा। गरीब किसानों का कर्ज माफ किया।  इन सबके बाद भी कोई मंत्री सरकार को गरीब वीरोधी बताए, या एक वर्ष पूरे होने पर उसे जीरो नम्बर दे तो इसे उनकी नेकनीयत नहीं कहा जा सकता।
    गनीमत है कि अमित शाह से मुलाकात का सकारात्मक परिणाम आया है। जनादेश, संसदीय व्यवस्था, गठबन्धन धर्म के अनुरूप ही आगे की यात्रा चलनी चाहिए।
    .लेखक वरिष्ठ पत्रकार है

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    1 Comment

    1. Neha mishra on March 22, 2018 11:48 pm

      Super balance by amit shah.

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