नीतू सिंह / शगुन सिंह
रक्षाबंधन, वह पवित्र पर्व जो भाई-बहन के रिश्ते को प्रेम और विश्वास की माला में पिरोता है, इस बार 9 अगस्त 2025, शनिवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। श्रावण मास की पूर्णिमा का यह दिन सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि एक ऐसी भावना है जो दिलों को जोड़ती है। बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी का पवित्र धागा बांधकर उनकी दीर्घायु और खुशहाली की प्रार्थना करती हैं, जबकि भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन लेते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि राखी बांधते समय तीन गांठें क्यों लगाई जाती हैं? आइए, इस प्राचीन परंपरा के पीछे छिपे गहरे अर्थ को खोलते हैं और इस पर्व की खूबसूरती को नए रंगों में देखते हैं।
राखी की तीन गांठें: एक धागे में बंधा प्रेम और विश्वास
जब बहन अपने भाई की कलाई पर रंग-बिरंगी राखी बांधती है, तो वह तीन गांठें लगाती है। यह कोई साधारण रस्म नहीं, बल्कि एक ऐसा पवित्र कार्य है जो आध्यात्मिकता और भावनाओं का अनूठा संगम है। हिंदू मान्यताओं में इन तीन गांठों को त्रिदेव अर्थात ब्रह्मा, विष्णु और शिव का प्रतीक माना जाता है, जो जीवन के तीन आधारभूत सिद्धांतों को दर्शाते हैं। प्रत्येक गांठ एक अनमोल आशीर्वाद और संदेश लेकर आती है:
पहली गांठ: नई शुरुआत का आलम
यह गांठ सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा को समर्पित है। यह भाई के जीवन में नई उम्मीदों, सपनों और सकारात्मक बदलावों का प्रतीक है। इस गांठ के साथ बहन अपने भाई के लिए एक उज्ज्वल भविष्य की कामना करती है, ताकि वह हर कदम पर नई ऊंचाइयों को छूए।
दूसरी गांठ: रक्षा का कवच
भगवान विष्णु को समर्पित है, जो जीवन के पालक और रक्षक हैं। यह गांठ भाई के लिए सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद मांगती है। यह एक वचन है कि भाई हर मुश्किल में अडिग रहेगा और जीवन की हर चुनौती का सामना करेगा।
तीसरी गांठ: बुराइयों से मुक्ति
भगवान शिव को समर्पित है, जो संकटों का नाश करने वाले और शक्ति के स्रोत हैं। यह गांठ भाई को हर विपत्ति से बचाने और उसे साहस प्रदान करने का प्रतीक है। यह एक आध्यात्मिक ढाल है जो भाई को बुराइयों और मुसीबतों से दूर रखती है।
प्रेम और विश्वास का अटूट धागा
राखी की तीन गांठें सिर्फ धार्मिक प्रतीक नहीं हैं; ये भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी की नींव रखती हैं। यह धागा केवल रेशम या सूत का नहीं, बल्कि बहन की भावनाओं, प्रार्थनाओं और उसकी अटूट आस्था का प्रतीक है। यह एक ऐसा बंधन है जो दूरी, समय और परिस्थितियों को पार करके भाई-बहन को हमेशा एक-दूसरे के करीब रखता है। राखी का यह पवित्र धागा हमें याद दिलाता है कि यह रिश्ता सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपराओं का गौरव भी है।
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
इस बार रक्षाबंधन का शुभ समय 9 अगस्त को सुबह 5:47 बजे से शुरू होकर दोपहर 1:24 बजे तक रहेगा। बहनों को इस पवित्र बंधन को बांधने के लिए 7 घंटे 37 मिनट का सुनहरा समय मिलेगा। इस समयकाल में राखी बांधने से न केवल भाई बहन की परस्पर परंपरा पूरी होगी, बल्कि यह बंधन और भी शुभ और फलदायी होगा।
योगी सरकार का तोहफा: रक्षाबंधन पर बहनें लें मुफ्त बस सेवा का लाभ
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने रक्षाबंधन को और खास बनाने के लिए बहनों को मुफ्त बस सेवा की सौगात दी है। 8 अगस्त 2025 की सुबह 6 बजे से 10 अगस्त की रात 12 बजे तक यूपीएसआरटीसी और नगरीय बस सेवाओं में सभी महिलाएं मुफ्त यात्रा कर सकेंगी। यह सुविधा ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लागू होगी, ताकि बहनें बिना किसी आर्थिक बाधा के अपने भाइयों तक पहुंच सकें। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिवहन विभाग को पर्याप्त बसें संचालित करने और ट्रैफिक जाम से बचने के लिए पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। यह पहल नारी सशक्तिकरण और त्योहार की खुशी को दोगुना करने का एक अनूठा प्रयास है।
सावधान रहें मौसम की मार से
रक्षाबंधन की तैयारियों के बीच मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। कई जिलों में स्कूलों की छुट्टियां घोषित की गई हैं। ऐसे में सभी से अपील है कि इस पर्व के उत्साह में सावधानी बरतें और सुरक्षित रहें।
रक्षाबंधन: समय को मात देता है एक बंधन
रक्षाबंधन सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि एक भावना है जो हमें अपने रिश्तों की गहराई और महत्व को समझने का मौका देती है। राखी की तीन गांठें न केवल आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखती हैं, बल्कि यह हमें प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी की याद दिलाती हैं। इस रक्षाबंधन, आइए, इस धागे को और मजबूत करें और अपने भाई-बहन के रिश्ते को प्यार और सम्मान के नए रंगों से सजाएं।







