क्या कहा… 101 साल पहले जन्मा था रसगुल्ला?

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ब्रिटिश गवर्नर जनरल से है बंगाल की इस मिठाई का वास्ता

1856 से 1862 तक ब्रिटिश भारत के गवर्नर जनरल रहे लॉर्ड कैंनिंग की पत्नी थीं शारलॉट। एक बार गवर्नर जनरल ने एक पार्टी दी। उसमें मिठाई देने की बात आई। शारलॉट चाहती थीं कि मिठाई अलबेली होनी चाहिए। तो मिठाई बनाने वालों से संपर्क किया गया। फिर यह मिठाई सामने आई। अंदर छेना और बाहर मैदे का खोल। जिसे तलकर रस में डुबोया जाता है। यानी गुलाब जामुन जैसा, लेकिन उसके जैसा गुलगुला नहीं। शारलॉट यानी लेडी कैनिंग को मिठाई बहुत पसंद आई और इसका नामकरण भी “लेडी केनी” हो गया।

एक तथ्य यह भी:

यह 1968 की एक तसवीर है और इस तसवीर का रसगुल्ले के आविष्कार से रिश्ता है। आप सोच रहे होंगे कि भला एक सख्त पत्थर का नरम रसगुल्ले से क्या रिश्ता ? तो चलिए पहले बताते हैं इस पत्थर को कहां और क्यों लगाया गया। यह पत्थर रसगुल्ले के आविष्कार के 100 साल पूरे होने पर लगाया गया था। कोलकाता के बागबाजार इलाके की जिस बिल्डिंग के बाहर यह पत्थर लगा है, वहां मौजूदा समय में एक बैंक है। अब जानिए कि पत्थर आखिर यहां लगाया क्यों गया ?

दरअसल, इसी जगह नबीन चंद्र दास (दाहिने) की दुकान थी। नबीन जी ने ही 1868 में रसगुल्ले का आविष्कार किया था। 101 साल पहले नबीन जी ने रसगुल्ले जैसी हरदिल अजीज़ मिठाई देश और दुनिया को दी।

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