नई दिल्ली । कोई भी शख्स कम से कम अपने जन्मदिन पर तो बड़ी चूक करना ही नहीं चाहता। फिर चाहे कोई नामी-गिरामी खिलाड़ी हो या फिर आम आदमी। श्रीलंका के खिलाफ जारी तीसरे टेस्ट के अंतिम दिन रवींद्र जडेजा ने भी यह नहीं सोचा होगा कि उनसे ऐसी चूक हो जाएगी। वह भी एक नहीं दो-दो बार हालांकि यह बात अलग है कि जडेजा एक बार तो गलती करने पर किसी तरह बच गए, लेकिन दूसरी गलती पर वह सजा से नहीं ही बच सके। सवाल यह है कि आखिर वह एक ही गलती दो-दो बार कैसे कर सकते हैं।
पहले तो हम यह बता दें कि टीम इंडिया के ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा आज 29 साल के हो गए हैं। बुधवार के दिन अपने 30वें साल में प्रवेश करने वाले रवींद्र जडेजा के लिए दिन सुबह-सुबह खुशी लेकर आया, जब उन्होंने दिन के छठे ही ओवर में पहली पारी के शतकवीर श्रीलंकाई ऑलराउंडर एंजेलो मैथ्यूज को सिर्फ एक रन पर ही चलता कर भारत की जीत की राह के एक बड़े रोड़े को हटा दिया। हालांकि जडेजा इस दौरान गलती कर चुके थे, लेकिन मैदानी अंपायर जोएल विल्सन की अनदेखी के कारण वह बच गए। बहरहाल, जडेजा के इस बहुमूल्य विकेट से भारतीय क्रिकेटप्रेमियों को यह उम्मीद हो चली कि आज 29वें जन्मदिन को यह ऑलराउंडर बहुत ही यादगार बनाते हुए जल्द ही लंकाइयों की लंका लगा देगा। लेकिन इस विकेट के बाद पहली पारी के शतकवीर कप्तान चंदीमल और डीसिल्वा ने लंगर डाल कर बल्लेबाजी की और भारतीय कों विकेट के लिए तरसा दिया। मैथ्यूज के आउट होने के बाद भारत की तरफ से फैंके गए अगले 22वें ओवर में ही बर्थ-डे ब्वॉय जडेजा ने चंदीमल की गिल्लियां बिखेर दीं। पर जडेजा एक बार फिर से बड़ी चूक कर बैठे थे, लेकिन मैदानी अंपायर विल्सन ने इस बार कोई गलती नहीं की। उन्हें जडेजा की एड़ी को लेकर शक हुआ। उन्होंने झट से तीसरे अंपायर की ओर इशारा कर दिया और तीसरी आंख ने जडेजा की इस गेंद को नोबॉल करार दिया। मतलब यह कि जडेजा एक की तरह की दूसरी गलती पर इस बार नहीं ही बच सके। चंदीमल को जीवनदान मिल गया। हालांकि श्रीलंकाई कप्तान इसका ज्यादा फायदा नहीं उठा सके। लेकिन यह बहुत ही अजीब सा लगता है कि टेस्ट क्रिकेट में जहां ज्यादा दबाव नहीं होता, ऐसे में कोई गेंदबाज खासकर स्पिनर कैसे दो बार नोबॉल फैंक सकता है।







