Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Saturday, September 12
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ज़रा हटके

    वह कौन था : भूत, भ्रम या हकीकत?

    ShagunBy ShagunJuly 22, 2025 ज़रा हटके No Comments5 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 1,097

    एक रहस्यमयी रात की सनसनीखेज कहानी : अनुराग प्रकाश की जुबानी 

    क्या आपने कभी ऐसी जगह पर रात बिताई है, जहां सन्नाटा आपका कोई पीछा करता हो और हर छोटी-सी आहट दिल की धड़कनें बढ़ा दे? यह कहानी साल 2002 या 2003 की है, जब एक जंगल के फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में बिताई रात ने चार दोस्तों को ऐसी दहशत में डाला कि वे आधी रात को वहां से भाग खड़े हुए। क्या यह सिर्फ वहम था, या वाकई कोई अनजानी शक्ति थी? आइए, इस रहस्यमयी किस्से में गोता लगाएं।

    जंगल की ओर एक रोमांचक सफर

    लखनऊ से चार दोस्त, मैं और मेरे तीन साथी। सुबह 6 बजे एक फॉरेस्ट रेस्ट हाउस की ओर निकले, जो शहर से दूर, घने जंगल में बसा था। रास्ते में मूसलाधार बारिश ने हमारा स्वागत किया, और बीच में एक जरूरी काम के चलते रुकने की वजह से हम गेस्ट हाउस तक पहुंचे तो शाम के 4 बज चुके थे। रेस्ट हाउस मुख्य कैंपस से इतना दूर था कि आसपास सन्नाटा पसरा था। मेरे दोस्तों के चेहरे लटक गए। “यहां तो कोई नहीं है, रात का खाना भी मिलना मुश्किल लगता है,” एक दोस्त ने उदासी से कहा। मैंने हौसला बढ़ाया, “चिंता मत करो, सब इंतजाम हो जाएगा।”

    चौकीदार की चाय और लालटेन की रौशनी का सन्नाटा

    रेस्ट हाउस के चौकीदार ने हमारी बात मान ली और खाना बनाने को तैयार हो गया। उसने पहले हमें गर्मागर्म काली चाय पिलाई, जिसने थोड़ी राहत दी। लेकिन जैसे ही सूरज ढला, अंधेरा गहराने लगा। उस समय रेस्ट हाउस में बिजली नहीं थी, तो चौकीदार ने हमारे कमरों में लालटेन जला दीं। हमने रेस्ट हाउस के ऊपरी हिस्से में दो कमरे बुक किए थे। रात होते-होते सन्नाटा इतना गहरा हो गया कि जंगल की हर छोटी-सी आवाज डरावनी लगने लगी। मेरे दोस्त, जो पहली बार जंगल आए थे, थोड़ा घबराए हुए थे। दिनभर की थकान के चलते हम अपने-अपने कमरों में आराम करने लगे।

    खाना खाने के बाद शुरू हुई रहस्यमयी रात

    खाना खाने के बाद, रात 9 बजे तक हम अपने कमरों में सोने चले गए। मैं, जो ज्यादातर ड्राइविंग की थकान से चूर था, बिस्तर पर लेटते ही सो गया। लेकिन नींद अभी लगी ही थी कि अचानक मेरे कमरे का दरवाजा जोर-जोर से खटखटाया गया। हड़बड़ाहट में उठा और पूछा, “कौन?” बाहर से मेरे दोस्तों की घबराई हुई आवाज आई, “हम हैं, दरवाजा खोलो!” मैंने तुरंत दरवाजा खोला तो दोनों दोस्त भागते हुए अंदर आए, चेहरों पर डर साफ झलक रहा था।“क्या हुआ?” मैंने पूछा। “पता नहीं, हमें लगा हमारे कमरे में कोई और भी है! ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई टहल रहा हो!” दोनों ने एक साथ कहा। मैंने समझाया, “ऐसा कुछ नहीं है, तुम्हें वहम हुआ होगा। शायद चौकीदार चादर रखने आया हो, और तुमने दरवाजा ठीक से बंद नहीं किया होगा।”
    लेकिन वे बोले, “नहीं, हमने दरवाजा अच्छे से बंद किया था।”

    लेकिन यह वहम नहीं था

    मैंने उन्हें शांत कराया और टॉर्च लेकर उनके कमरे में गया। पूरा कमरा चेक किया, लेकिन वहां कुछ भी नहीं था। न कोई इंसान, न कोई जानवर। मैंने कहा, “यह सिर्फ तुम्हारा वहम है। अब आराम से सो जाओ।” लेकिन वे डरे हुए थे। “नहीं, हम दरवाजा बंद नहीं करेंगे, और तुमसे भी अनुरोध है कि तुम भी दरवाजा बंद मत करना, ताकि जरूरत पड़ने पर हम तुम्हारे कमरे में आएं।” मैंने सहमति दे दी और कहा, “ठीक है, मैं दरवाजा सिर्फ उड़काऊंगा, सिटकनी नहीं लगाऊंगा।”

    आधी रात को लगा कि कमरे में कोई टहल रहा है

    मैं अपने कमरे में लौटा और बिस्तर पर लेट गया। बाहर सियारों की चीखें डरावना माहौल बना रही थीं। मैं तो जंगल की इन आवाजों का आदी था, लेकिन मेरे दोस्तों के लिए यह सब नया और डरावना था। मैं सोच ही रहा था कि नींद फिर लग गई। तभी अचानक मेरा दरवाजा जोर से खुला, और मेरे दोस्त दहशत में मेरे कमरे में घुस आए। “भैया, उठो! यहां से जल्दी निकलो! कुछ गड़बड़ है। हमें फिर लगा कि कमरे में कोई टहल रहा है। अब हम किसी भी हाल में यहां नहीं रुकेंगे!” मैंने समझाने की कोशिश की, “घबराओ मत, इतनी रात में जंगल के रास्ते से निकलना खतरनाक है। सुबह जल्दी निकल चलेंगे। तब तक हम सब एक कमरे में सो जाते हैं।” लेकिन वे नहीं माने। “नहीं, हम गाड़ी में ज्यादा सुरक्षित महसूस करेंगे,” कहकर वे जिद पर अड़ गए।

    आधी रात को भागने का फैसला

    मजबूरन मुझे उनकी बात माननी पड़ी। रात के 3 बजे हमने जल्दी से सामान समेटा, अपनी मारुति कार में बैठे, और पांच मिनट में रेस्ट हाउस से मुख्य सड़क पर पहुंच गए। तब जाकर मेरे दोस्तों की जान में जान आई। पास के कस्बे तक पहुंचने में हमें एक घंटा लगा। मुझे लगा कि आगे जाना ठीक नहीं, इसलिए मैंने रेलवे स्टेशन पर कार रोक दी। हम सब स्टेशन पर ही टहलने लगे। सुबह 5:30 बजे मैंने लखनऊ के लिए गाड़ी मोड़ दी।

    रहस्य अनसुलझा है अभी भी

    रास्ते में दोस्तों से बात करने पर उन्होंने फिर वही कहा -उन्हें लगा कि कमरे में कोई टहल रहा था, और थोड़ी देर बाद ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई उनके बगल में कुर्सी पर बैठ गया हो। मैं आज भी नहीं समझ पाया कि उनके कमरे में ऐसा क्या था कि वे दो बार कोशिश के बावजूद वहां रुक नहीं पाए। मेरा मानना है कि यह सिर्फ उनका वहम था। वीरान जंगल और सन्नाटे ने उनके दिमाग में ऐसी कल्पनाएं भर दीं, जो धीरे-धीरे हकीकत-सी लगने लगीं। लेकिन क्या यह वाकई सिर्फ भ्रम था, या उस रेस्ट हाउस में कोई अनजानी मौजूदगी थी? यह सवाल आज भी अन जवाब है। तो क्या था वह ! भूत, भ्रम, या हकीकत? आप क्या सोचते हैं? यह कहानी सिर्फ एक डरावनी रात की याद नहीं, बल्कि उस अनजाने डर की गूंज है, जो जंगल के सन्नाटे में आज भी कहीं गूंज रही है।

    Shagun

    Keep Reading

    नालसा का एलएडीसी सिस्टम खत्म करने का फैसला: क्या गरीब कैदियों से छिन जाएगा न्याय का सहारा?

    A Scorpio on the roof! Thieves were stunned and the whole country had a laugh at this *jugaad* (ingenious hack) by a man from Gopalganj, Bihar.

    चोरों से बचाने को छत पर चढ़वा दी स्कॉर्पियो! इस बिहारी का जुगाड़ देखकर चोर भी हैरान, देश भी हंस पड़ा

    Nepal Flood Tragedy: The Most Harrowing Incident of Devastation

    नेपाल बाढ़ त्रासदी: तबाही का सबसे दर्दनाक हादसा

    रक्षाबंधन: परंपरा, पहचान और बाजारवाद का संगम

    Trump Trapped in a Labyrinth: US President's Mounting Difficulties Amid the Maze of an Iran War

    चक्रव्यूह में फंसे ट्रंप: ईरान युद्ध की भूलभुलैया में अमेरिकी राष्ट्रपति की बढ़ती मुश्किलें

    'Take 5 lakhs, just save my brother...' Kanwariya swept away by the Ganga's strong current; brother stood on the bank, pleading desperately.

    ‘5 लाख ले लो, बस मेरे भाई को बचा लो…’ गंगा की तेज धार में बह गया कांवड़िया, किनारे खड़ा भाई गिड़गिड़ाता रहा

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Bollywood’s ‘Singham’ Ajay Devgn brings prestige to Haridwar International Ayurveda.

    बॉलीवुड के ‘सिंघम’ अजय देवगन ने बढ़ाया हरिद्वार इंटरनेशनल आयुर्वेद का गौरव

    September 11, 2026
    New NIXI-APNIC Partnership to Strengthen Internet Security in India

    14 साल बाद भारत में लौटा APNIC सम्मेलन, NIXI के साथ नई साझेदारी से मजबूत होगी देश की इंटरनेट सुरक्षा

    September 11, 2026
    Prime PR honored as ‘Best PR Agency’ at the Quality Mark Awards 2026.

    प्राइम पीआर को क्वालिटी मार्क अवॉर्ड्स 2026 में मिला ‘बेस्ट पीआर एजेंसी’ का सम्मान

    September 11, 2026
    The divine devotion of Chhath showcased on the big screen for the first time; Tamannaah Bhatia wins hearts in the song 'Chhathi Maiya' from the film 'The Vvaan'.

    बड़े पर्दे पर पहली बार दिखी छठ की अलौकिक आस्था, ‘द व्वान’ के गाने ‘छठी मैया’ में तमन्ना भाटिया ने जीता दिल

    September 11, 2026
    'The Shape of Belonging': A documentary exploring new perspectives beyond ramps and lifts.

    ‘द शेप ऑफ बिलॉन्गिंग’: रैंप और लिफ्ट से आगे बढ़कर नई सोच तलाशती डॉक्यूमेंट्री

    September 11, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading