ऑक्सीजन की कमी से ही हुईं बच्चों की मौतें: मजिस्ट्रेट जांच रिपोर्ट में खुलासा

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लखनऊ, गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई मासूमों की मौत में के बाद, मजिस्ट्रेट जांच रिपोर्ट आ चुकी है जिसमे साफ कहा गया है कि ऑक्सीजन की कमी से ही हुईं बच्चों की मौतें हुई हैं और इसके ज़िम्मेदार सिर्फ वहां के प्रशासनिक अधिकारी, और लेखा कर्मचारी हैं इसके आलावा पुष्पा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी को भी कटघरे मे खड़ा किया गया है अब देखना है प्रसाशन इन पर क्या बड़ी करवाई करता है?

जिलाधिकारी राजीव रौतेला द्वारा कराई गई मजिस्ट्रेट जांच रिपोर्ट आ चुकी है जिसमे यह साफ़ हो गया है कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई मासूमों की मौत के पीछे आक्सीजन की कमी बड़ी वजह रही। रिपोर्ट में इस बात खुलासा किया गया है कि ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित कराए बगैर जिम्मेदार छुट्टी चले गए। यदि समय रहते अपनी जिम्मेदारियों का निवर्हन किया होता तो शायद यह परिस्थिति ही न पैदा होती। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिलाधिकारी राजीव रौतेला ने अपनी जांच रिपोर्ट तैयार की है।

रिपोर्ट में यह पाएं गए दोषी:
  • डीएम राजीव रौतेला की रिपोर्ट के मुताबिक कालेज के निलंबित प्राचार्य एवं सबसे जिम्मेदार व्यक्ति डा. राजीव मिश्रा ने समय से आपूर्ति बंद होने की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी। 9 अप्रैल को मुख्यमंत्री को दौरे के तत्काल बाद छुट्टी पर चले गए। मुख्यमंत्री 4 घंटे तक मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध रहे लेकिन एक बार भी इस संभावित संकट पर चर्चा नहीं की।
  • डॉक्टर सतीश कुमार भी अपनी जिम्मेदारियों से बचते रहे। प्राचार्य के अवकाश पर जाने के बाद सतीश कुमार 11 अगस्त को बिना किसी अधिकारिक सूचना के अवकाश पर चले गए। उन्होंने ऑक्सीजन की उपलब्धता को सुनिश्चित नहीं किया।
  • डॉक्टर सतीश कुमार साथ के साथ सहायक के रूप के आक्सीजन की उपलब्धता को लेकर लॉग बुक और स्टाक बुक संभालने वाले चीफ फार्मासिस्ट गजानन जयसवाल को भी दोषी पाया गया। जांच कमेटी के समक्ष वे अपडे़ट लॉग बुक और स्टाक बुक नहीं प्रस्तुत कर पाए। न ही उन कोई हस्ताक्षर था, जबकि कई स्थानों पर ओवरराइटिंग भी मिली।
  • लेखाविभाग को इस बात के लिए जिम्मेदार ठहराया गया क्योंकि जब शासन से बजट आया तो प्राचार्य को समय से सूचित नहीं किया गया, न ही उनके समक्ष पत्रावली प्रस्तुति की गई। हालांकि जांच कमेटी के समक्ष लेखा विभाग के कर्मचारियों ने कहा कि ऐसा उन्होंने प्राचार्य के मौखिक आदेश पर किया था। इसके लिए कार्यालय सहायक उदय प्रताप शर्मा को जिम्मेदार माना गया। पुष्पा सेल्स के भुगतान की फाइल इन्हीं के पास थी। इसके अलावा लेखा लिपिक संजय त्रिपाठी एवं सहायक लेखाकार सुधीर पांडेय को भी जिम्मेदार ठहराया माना गया।
  • पुष्पा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी भी कटघरे मे: 
    ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद किए जाने के लिए पुष्पा सेल्स को जिम्मेदार ठहाराया गया। कमेटी ने माना कि आक्सीजन जीवन रक्षक दवाओं की श्रेणी में आता है। ऐसे में फर्म इसकी आपूर्ति बंद नहीं कर सकती थी।
  • इन पर गिर चुकी गाज
    प्राचार्य डॉक्टर राजीव मिश्रा निलंबित किए जा चुके हैं। उन्होंने निलंबन के पूर्व प्राचार्य पद से त्यागपत्र भी दे दिया था। डा. कफिल खान को 100 नम्बर वार्ड के नोडल प्रभारी पद से हटाया जा चुका है। शेष अन्य के खिलाफ अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। डा. कफिल पर इसलिए भी गाज गिरी क्योंकि उन्होंने स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष ही स्वीकार कर लिया था कि वे निजी प्रेक्टिस करते हैं, तीन जम्बो ऑक्सीजन सिलेंडर अपने अस्पताल लेकर आए थे।

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