रोबोट ने महज चार घंटे में सीख लिया शतरंज, बदले खेल के तौर-तरीके

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नई दिल्ली 26 दिसम्बर। नई तकनीक और वैज्ञानिक आविष्कारों ने हमारे जीवन को बेहद जटिल बना दिया है। इन दिनों यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या एक दिन रोबोट हमारा स्थान ले लेंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) द्वारा ऐसी मशीनें बनाई जा रही हैं, जो इंसानों के काम को आसानी से कम कर देगी और जिन कामों के लिए इंसानों की बुद्धिमता की जरूरत होती है, उन काम को मशीनों से कराया जा सकेगा। इस साल ऑक्सफॉर्ड अकादमी के प्रोफेसर मिशेल वुलड्रिज ने चेताया है कि जल्दी ऐसा समय आने वाला है जब मशीने इतनी जटिल हो जाएंगी कि इंजीनियर खुद नहीं समझ पाएंगे कि वे आगे कैसे काम करेंगी। लेकिन हाल ही में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की एक नई मशीन ने सबको चौंका दिया है। इस मशीन ने अपनी श्रेष्ठता शतरंज के खेल में प्रदर्शित की है। एआई के कंप्यूटर प्रोग्राम “अल्फाजीरो” प्रोग्राम ने चेस बोर्ड पर साबित कर दिया कि यह विश्व का सर्वश्रेष्ठ शतरंज चैंपियन है। इस नए प्रोग्राम ने पुराने विजेताओं को कहीं बहुत पीछे छोड़ दिया है।

क्या है अल्फाजीरो

अल्फाजीरो चार घंटे में शतरंज का खेल सिखा देता है। यह एक ऐसा प्रोग्राम है जो बहुत आसानी से आपको खेल के नियम समझा देता है और ये भी बता देता है कि आप कैसे खेल जीत सकते हैं। उन 240 मिनट की प्रैक्टिस में खेल की बारीकियां सिखाई जाती हैं। इंसानी दिमाग को कैसे हराया जा सकता है। खेल जीतने के लिए ऐसी रणनीति सिखाई जाती हैं जो अंतत: लाजवाब साबित होती है। गैरी केसपेरोव, सन 1997 में आईबीएम सुपर कंप्यूटर डीप ब्लू से हार गए थे। उस समय कहा गया था कि मशीनों में यह ताकत होती है जो इंसानी नॉलेज को पीछे छोड़ देती है। इसी साल छह दिसंबर अल्फाजीरो ने चेस की दुनिया पांव जमाया और छा गया।

कहां और कैसे हुआ जन्म

अल्फाजीरो का जन्म लंदन में हुआ है। एक ब्रिटिश कंपनी के वैज्ञानिकों के दिमाग की उपज है यह प्रोग्राम। इसका नाम डीपमाइंड है। यह कंप्यूटर प्रोग्राम बनाते हैं जो अपने ही लिए काम करते हैं। अल्फाजीरो को एल्गोरिदम भी कहते हैं। ये एक तरह के गणित के निर्देश हैं जो किसी भी सवाल का जवाब देते हैं। इसे हम डीप मशीन या लर्निंग टूल भी कह सकते हैं। इसके पास समस्याओं को सुलझाने की सामर्थ्य है, जो गति और समय के साथ-साथ अपनी बुद्धि को तीन गुना बढ़ाती जाती है। शतरंज से साबित हो गया है कि इस प्रोग्राम की सोच इंसानी दिमाग से ज्यादा तेज है।

कैंसर का पता लगाने में भी सक्षम

इस तरह के प्रोग्राम केवल शतरंज पर ही अपनी श्रेष्ठता नहीं दिखाते। इंसानों की जिंदगी और मौत के बारे में भी विल्कुल ठीक-ठीक भविष्यवाणी कर सकते हैं। लंदन के एक अस्पताल एनएचएस, यूनिवर्सिटी कॉलेज और हॉस्पिटल, मुरफील्ड आई हॉस्पिटल में भी इसका ट्रायल हो चुका है। यूसीएलएच में एआई ने एक ऐसे सिस्टम बनाया है जो यह पता लगाया कि आपके दिमाग और गर्दन में कैंसर है या नहीं। एआई की यह मशीन या प्रोग्राम इंसानों से पहले कैंसर के निदान में सक्षम है। डॉक्टरों की कैंसर के रेडिएशन में चार घंटे से ज्यादा का समय लगता है, वहीं इस मशीन को केवल एक घंटे का समय लगता है। ऐसा कहा जाता है कि एआई कोई भी मेडिकल बीमारी की जांच में सबसे तेज है। लंदन के एनएचएस अस्पताल में मरीजों को इससे बहुत फायदा मिला है। हालांकि इस नए प्रोग्राम से मरीजों की प्राइवेसी पर एक सवाल जरूर उठता है।

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