तेजस्वी बोले- ‘नाम कट गया, अब कैसे लडूंगा चुनाव?’
पटना: बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले एक सनसनीखेज खबर सामने आई है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रमुख नेता और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। तेजस्वी ने खुद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात की जानकारी दी और कहा, “मेरा नाम वोटर लिस्ट में नहीं है, अब मैं चुनाव कैसे लडूंगा?”
तेजस्वी ने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे एक सुनियोजित साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि यह कदम गरीबों, दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के मताधिकार को छीनने की कोशिश है। तेजस्वी ने दावा किया कि इस प्रक्रिया के तहत लाखों वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं, जिससे बिहार की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुँच सकता है।
इस बीच, कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। एक दिन पहले राहुल ने आरोप लगाया था कि “चुनाव आयोग के अधिकारी वोटों की चोरी करा रहे हैं।” उन्होंने कहा, “हमारे पास कर्नाटक में मतदाता सूची में हेरफेर के 100% सबूत हैं, और हम इन अधिकारियों को बख्शेंगे नहीं।” राहुल ने बिहार में चल रही मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया और दावा किया कि यह प्रक्रिया सत्तारूढ़ एनडीए के इशारे पर हो रही है।
तेजस्वी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी कहा कि अगर मतदाता सूची में इस तरह की गड़बड़ियाँ जारी रहीं, तो महागठबंधन चुनाव बहिष्कार जैसे कड़े कदम पर विचार कर सकता है। उन्होंने कहा, “जब पूरी प्रक्रिया में बेईमानी हो रही है, तो चुनाव का क्या मतलब? हम अपने समर्थकों और बिहार की जनता के साथ मिलकर इस अन्याय के खिलाफ लड़ेंगे।”
चुनाव आयोग ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि SIR प्रक्रिया का मकसद मतदाता सूची को पारदर्शी और सटीक बनाना है। आयोग का दावा है कि मृत, स्थानांतरित या अपात्र वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं ताकि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हो सके।
इस विवाद ने बिहार के राजनीतिक माहौल को और गर्मा दिया है। आरजेडी और कांग्रेस सहित महागठबंधन के नेता इस मुद्दे पर सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि बीजेपी और जेडीयू ने इन आरोपों को आधारहीन बताकर खारिज किया है।







