खिलते हैं ख़्वाब

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पालकी सितारों ने सजायी आज ख़ुशियों की,
जन्नत की कम लगने लगी बिसात है।
प्यार कभी मुझको मनाता कभी रूठता है ,
जंग भी वो जिसमे कि शह है, न मात है।
खेल रहे होठों के गुलाब खिलते हैं ख़्वाब,
रंग और नूर की ये मीठी मुलाक़ात है।
चाँद मेरी बाँहों में लजाता- मुस्कुराता ख़ुद,
ज़िन्दगी लगे है ज़श्न, क्या हसीन रात है।

-कमल किशोर ‘भावुक’

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