कोरोना पंच
कोरोना जी! हाथ जोड़कर दूर से तुम्हे प्रणाम,
दुनिया भर को डरा रहा है आज तुम्हारा नाम ।
लेकिन मैं न होने दूँगा, खाँसी और जुकाम
मास्क लगाकर घूम रहा हूँ, रोज सुबह और शाम।
साथ सेनिटाइजर रखता।
नही मैं तुमसे डरता।।
- अरविन्द कुमार “साहू”
कल रात मेरे सपने में आई कोरोना
कल रात सपने में आई कोरोना….
उसे देख जो मैं डरा …
तो मुस्कुरा के बोली –मुझसे डरो ना।।
उसने कहा-” कितनी अच्छी है तुम्हारी संस्कृति ।
न चूमते ,न गले लगाते
दोनों हाथ जोड़ कर वो स्वागत करते ।।
मुझसे डरो ना।
कहाँ से सीखा तुमने ??
रूम स्प्रे ,बॉडी स्प्रे ,
पहले तो तुम धूप , दीप कपूर अगरबत्ती ,लोभान जलाते
वही करो ना ,
मुझसे डरो ना।।
शुरू से तुम्हें सिखाया गया
अच्छे से हाथ पैर धोकर घर में घुसो,
मत भूलो अपनी संस्कृति
वही करो ना
मुझसे डरो ना।।
उसने कहा ” सादा भोजन उच्च विचार'”
यही तो है तेरे संस्कार।
उन्हें छोड़ जंक फूड फ़ास्ट फूड के चक्कर में पड़ो ना
मुझसे डरो ना ।।
उसने कहा- शुरू से ही अमुक जानवरों को पाला पोसा प्यार दिया ”
रक्षण की है तुम्हारी संस्कृति ,उनका भक्षण करो ना
मुझसे डरो ना ।।
कल रात मेरे सपने में आई कोरोना
बोली मुझसे डरो ना ।।








