तुम्हारे आने का हर लम्हा गर मुकर्रर हो जाए

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अगर बरसात में घर का टपकना बंद हो जाए,
तो हर एक बूंद में आनंद ही आनंद हो जाए।।
तुम्हारे आने का हर लम्हा गर मुकर्रर हो जाए,
हमें क्या हर कोई फिर वक्त का पाबंद हो जाए।।

  • वीरेंद्र जैन
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