युवाओं की हुंकार
हो अब यलगार!
मातृभूमि कर रही आह्वान
जाग युवा जाग!
नफ़रत का हथियार
कर रहा अमन का विनाश।
बेसुध पड़ा विकास
मचा चहुंओर हाहाकार।
उछल रहा अपराध
छिन रहा रोजगार।
बेरोजगारों की हुंकार
हो अब यलगार!
दम तोड़ रहे व्यापार
भविष्य अंधकार।
छात्र और किसान
हो गए अब बेहाल।
आत्महत्या का बढ़ा ग्राफ
मर रहे अरमान!
अच्छे दिनों के बदले मिला
रोता हुआ देश।
युवाओं की हुंकार
हो अब यलगार!
मातृभूमि कर रही आह्वान
जाग युवा जाग! –राहुल कुमार गुप्त







