पटना। पटना के बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन सभागार में आज डॉ लाला आशुतोष कुमार शरण द्वारा लिखित काव्य संग्रह ‘गुलदस्ता’ का विमोचन जनता दल (यू) के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद के हाथों संपन्न हुआ। इस मौके पर अपने संबोधन में राजीव रंजन प्रसाद ने पुस्तक को आज के प्रसंग में बेहद महत्वपूर्ण बताया और कहा कि डॉ लाला आशुतोष कुमार शरण, रसायन शास्त्री हैं। बावजूद साहित्य में उनका लगाव हमें प्रेरणा देने वाला है। काव्य संग्रह ‘गुलदस्ता‘ की कविताएं अपनी वैचारिकता और भावपूर्ण संप्रेषण के कारण पाठकों पर गहरा प्रभाव डालने की क्षमता रखती है। डॉ शरण ने अपनी कविताओं में प्रकृति के अनुपम सौंदर्य के साथ अपनी जिंदगी के सच पर सामाजिक, पारिवारिक और मानवीय संबंधों का सूक्ष्म चित्रण करते हैं, जो दुलर्भ है। मेरा मानना है कि उर्दू के शब्दों के प्रयोग से हिंदी और भी समृद्ध होती जा रही है।
पुस्तक विमोचन कार्यक्रम की शुरूआत पारंपरिक तौर पर हुई, जहां आगत अतिथियों को गुलदस्ता देकर सम्मानित किया। उसके बाद इस काव्य संग्रह के लेखक कवि डॉ लाला आशुतोष कुमार शरण ने कहा कि वे विज्ञान के विद्यार्थी और शिक्षक होते हुए भी साहित्य से कॉलेज के दिनों से ही जुडे रहे। मुझे काव्य विधा का व्याकरण ज्ञात है और न ही कभी सीखने की कोशिश की। दिल ने जो कहा, कागज पर उतार दिया। मित्रों और परिजनों ने इसे संवरने और निखरने के लिए प्रोत्साहित किया। यही वजह है कि मेरी पुस्तक ‘गुलदस्ता’ अब आपके समक्ष है। उन्होंने बताया कि इस काव्य संग्रह की विशेष बात यह है कि इसमें हिंदी और उर्दू का बेजोड़े संगम पाठकों को मिलेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ उमाशंकर पांडेय ने भी पुस्तक की सराहना की और कहा कि साहित्य के बिना समाज की कल्पना असंभव है। ऐसे में डॉ लाला आशुतोष कुमार शरण की पुस्तक ‘गुलदस्ता’ की प्रासंगिकता आज के समय में काफी बढ़ जाती है, वो भी तक जब दो भारतीय भाषा का एक फ्रेम में बेजोड़ समायोजन हो। इस पुस्तक के लिए डॉ लाला आशुतोष कुमार शरण की तारीफ जितनी की जाये कम है। मौके पर एच डी जैन कॉलेज कर्नल प्रत्युष शरण, विजय भास्कर, मनीष कुमार, अर्पणा भारती समेत के गणमान्य लोग उपस्थित हुए।







