Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 549 जनसेवा में भी सदा, देखें प्रॉफिट लॉस। राजनीती अब हो गयी, सुख सुविधा की दास।। सुख सुविधा की दास, रास उसको ही आये, जो नैतिकता छोड़, माल जनता का खाये, आँख गड़ी बस वहां, जहाँ सत्ता का मेवा। राजनीती अब यही, यही है बस जनसेवा।। -सीएम त्रिपाठी
‘पुस्तकें मन को एकाग्र कर परंपराओं से जोड़ती हैं’-ब्रजेश पाठक; ईशा-मीशा रतन की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन