बीस रुपए का नोट है, यह सोच कर उसने दो हजार रुपए का नोट खर्च कर दिया।
पांच रुपए का नोट है, यह सोच कर उसने पांच सौ रुपए का नोट खर्च कर दिया।
दो रुपए का नोट है, यह सोच कर उसने दो सौ रुपए का नोट खर्च कर दिया।
मंगलूलाल है, यह सोच कर उसने मुक्तिबोध को खर्च कर दिया।
मंगलूलाल ब्राह्मण है।
-अविनाश मिश्र







