कितने गहरे घाव

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वैभव के गलियारों का
अपना ही अंदाज।
जो आया इस ओर तो
उसका बेड़ा पार।।
अपने अपने पाले हैं
अपने अपने दांव
जीत गए तो वाह वाह
हारे तो संताप।।
तरकश सब तैयार है
शब्दों के हैं वाण।
फुर्सत हुई तो देखेगें
कितने गहरे घाव।।
– डॉ दिलीप अग्निहोत्री

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