आप सब लड़ते रहिए

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वो आपके ही वोट से,
आपको ही लेंगे छीन।
भय को व्याप्त कर,
सुख-चैन लेंगे छीन।।
आप सब लड़ते रहिये,
किसी न किसी वाद पर।
सत्ता पाकर वो बजाते,
विध्वंस की बीन।।
मानवता भी बेच देंगे,
वो मात्र सत्ता में लीन।
बच्चों की साँसों पे भी,
वो करते राजनीति।।
इनकी संवेदनहीनता पे,
सब लोग तमाशबीन।।

  • राहुल गुप्ता

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