प्यार से प्रारंभ कर
उत्तेजना पर शेष किया महेश ने
संसारप्रसिद्ध उद्धरणों को दुहराता हुआ वह
गुज़रता रहा संकट के आतंक से
जिन किताबों ने बनाया उसे
वह छूता रहा उन्हें अँधेरे में।
एक ही रूप में सब पहर खोया हुआ
जैसे संग-ए-मरमर हो स्याही से धोया हुआ
वह रात गए लौटता रहा
साइकिल पर दिन भर रिपोर्टिंग करने के बाद
तेज़ी से बदल रही थीं ख़बरें
लेकिन उसकी दिलचस्पी
ख़बर बनाने में नहीं
घर बनाने में रही आई।
- अविनाश मिश्र







