साहित्य की कई विधाओं यथा निबंध, कविता, गीत, गज़ल, कहानी, आलेख आदि के बाद राहुल कुमार की कुछ शायरियों पर एक नज़र..1-आ जाओ थोड़ा पास या थोड़ा दूर ही सही।
कि युगों बीत चुके हैं तुम्हें करीब से देखे।।
2-जरूरी ये नहीं कि तुम सही को सही समझो।
जो तुम्हें समझना है तुम बस वही समझो।।
3-तुम तो सदा दूर थे समझते हमें गैर थे फिर भी मोहब्बत मैंने कर लिया।
खुद के मन को तेरा प्रतिनिधि बना मैंने खुद से मोहब्बत कर लिया।।
4-वायदों की पोटली लेकर खूब दिखाया है सपना आपने।
एक राह क्या पूछी, खुद को समझ लिया मसीहा आपने।।
5-जा रहे हैं अब दूर इस कदर की दूरी भी हैरान हो जाये।
अब खुद भी खुद को नज़र न आयेंगे किसी आईने में।।
6-पता नहीं इस बेइंतेहा मोहब्बत का अंत क्या है।
पर इतना जरूर है तेरी खुशियाँ ही इसका मुकाम है।।
7-मैं नहीं करुंगा कोई भी बातें ऐसी।
जो तुमको न लगें कुछ भी अच्छी।
8-काश् समझते मेरे दिल की हक़ीकत।
यूँ सौ बार सोचते कुछ बातें बोलने से पहले।।
9-तुम जीत सकते हो जंग बस एक जिद्द बाकी हो।
मेहनत तुम्हारी हो और दुआ अम्मा की हो।।
10-जाने क्यूँ तुमपे खो जाने का मन करता है।
आ जाओ कि तुमको बाँहों में लेने का मन करता है।।







