हे बूढ़े बरगद बाबा!

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अन्तर्राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस पर विशेष:

हे बूढ़े बरगद बाबा!!!!
तुम ऐसे निर-उत्साहित क्यों हो?
कहाँ गयी वो लम्बी शाखें, कहाँ गये हरियाले पत्ते ?
कहाँ गयी वो सुदृढ जटायें, जिनसे थे तुम बाबा लगते ?
उन्हे चाहिये बूढ़े होते, तन का भार थाम कर रखती,
नयी उर्जा तुमको देकर, सम्बल के परिवर्तन रचती ।
पूजित और सम्मानित होकर,
तुम इतने अपमानित क्यों हो?
हे बूढ़े बरगद बाबा ?????

  • अरविन्द कुमार ‘साहू’ (7007190413)

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