नई दिल्ली, 25 जून: साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित “साहित्य मंच” कार्यक्रम में तीन कथाकारों ने अपनी स्त्री-केंद्रित कहानियाँ प्रस्तुत कीं। सर्वप्रथम योगिता यादव की कहानी ‘गंध’ ने सारिका और अभिनव की प्रेम कथा के माध्यम से अभिनव की मिग-21 दुर्घटना के बाद सारिका के मानसिक स्वास्थ्य और समाज में स्त्रियों की मनोवैज्ञानिक चुनौतियों को उजागर किया।
हरियश राय की कहानी ‘अंतिम पड़ाव’ में सोना घोष के जरिए वृंदावन की विधवा स्त्रियों के जीवन की त्रासदी को चित्रित किया गया। वहीं, हरिसुमन बिष्ट की कहानी ‘अदृश्य पंखों पर उड़ान’ ने दादी-पोती के संवादों के सहारे पहाड़ी स्त्रियों के जीवन-संकट को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। तीनों कहानियों ने स्त्रियों की सामाजिक उपस्थिति और संघर्ष को प्रभावी रूप से रेखांकित किया।
कार्यक्रम में जानकी प्रसाद शर्मा, राजकुमार गौतम, प्रज्ञा, हीरालाल नागर, पवन कुमार माथुर, द्वारिका प्रसाद चारुमित्र, अशोक मिश्र, वंदना यादव, प्रताप सिंह सहित अनेक साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।







