कच्चे आम का पना… गर्मियों में इससे बेहतर पेय क्या होगा! टेस्टी भी, हेल्दी भी। चेहरे पे निखार बोनस है। लू से बचाता है ईएसआई की तरह और हाजमा दुरुस्त रखता है फंड की तरह। पूरा सीजन आप तरोताजा रहते हैं बीमा की तरह। बहुत कुछ है आम के इस खास पेय में।
बालवृंद इस रस में सराबोर होकर बड़ा आनंदित होते हैं। कैशोर्य इसके स्वाद के लिए कुलांचे मारता है और तरुणाई इस रस को पीकर अंगड़ाई लेती है। बुजुर्गों के लिए संजीवनी से कम नहीं।
गर्मियों की तपती दोपहर इसकी तासीर से शीतल लगती हैं, उदास शामें इसके असर से खिलखिलाती हैं। सुबहें ताजगी में नहाई हुई। पूरा दिन, दिन जैसा लगता है आम के इस खास पेय से।

यूं तो कच्चे आम का पना कई विधियों से बनाते हैं लोग, उबालकर या कच्चा ही छीलकर… पर मेरे विचार से सबसे अच्छा तरीका आम को सीधे आग में भूनकर बनाना है। सुबह पेड़ों से गिरी हुई अमिया उठाकर या तोड़कर लाइए, शाम के धुंधलके में घास-फूस इकट्ठा कर उसमें आग जलाइए और उसी में कच्चे, निरपराध आमों को डाल दीजिए।
जब हरे आमों का रंग गंदुमी हो जाए और वो छूने पर पिलपिले लगें तो आग से निकाल लीजिए। कुछ देर ठंडे पानी में रखिए। तब तक पुदीने की पत्तियां, काला नमक, सौंफ, भुना जीरा और काली मिर्च सिलवट पर पीस लीजिए। फिर पानी में पड़े भुने आम को बाहर निकालिए। किसी बड़े बर्तन में थोड़ा पानी लीजिए और उसमें अच्छे से उन्हें धो लीजिए। राख बिल्कुल न लगी रहे। फिर उसी बर्तन में साफ पानी लेकर उनका पल्प या पका हुआ गूदा दबा-दबाकर निकालिए।
इस मिश्रण को अच्छे से मिलाइए। फिर उसमें नमक- पुदीने का मसाला मिलाइए। जरूरत के हिसाब से पानी मिलाइए और अच्छे से घोंट दीजिए। आम का पना तैयार। ठंडा पीना चाहें तो बर्फ मिला लीजिए। जैसी आपकी इच्छा। वैसे बिना बर्फ के पिएंगे तो ज्यादा फायदेमंद होगा। दिव्य स्वाद तो देता ही है, दिव्य निपटान भी अच्छे से होता है।
इसके फायदों के बारे थोड़ा ऊपर बता ही चुके हैं, थोड़ा और जिक्र हो जाए।
जब गर्मी के मौसम में पसीने के रूप में शरीर से इलेक्ट्रोलाइट्स खत्म हो जाते हैं, विशेष रूप से बॉडी साल्ट जैसे सोडियम। इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी की वजह से शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाती है और शरीर थक जाता है। ऐसे में लू लगने की आशंका बढ़ जाती है। आम का पना इन इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करता है, उन्हें संतुलित रखता है।
इसमें ना वसा है ना कोलेस्ट्रॉल। लू लगने पर अमृत जैसी शीतलता देता है आम का पना। जी मिचलाए तो आम का पना। पेट गुड़गुड़ाए तो आम का पना। प्यास सताए तो आम का पना। जी ललचाए तो आम का पना। रहा ना जाए तो आम का पना।
आंतों के लिए उपचार एजेंट के रूप में कार्य करे आम का पना। पेट की गैस, पेट के कीड़े, अपच, दस्त, कब्ज और पाइल्स जैसी समस्याओं को आसानी से दूर करे आम का पना। एनीमिया में लाभकारी, थकान और सस्ती दूर करे। आयरन से भरपूर आम का पना लाल रक्त कोशिका की संख्या बढ़ाकर हीमोग्लोबिन की संख्या में इजाफा भी करता है।
आम का पना एंटीऑक्सिडेंट और विटामिन-सी का बहुत अच्छा स्रोत है, इसे नियमित पीने से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली भी बढ़ती है। ये पोषक तत्व हमारे शरीर को सूक्ष्म जीवों से लड़ने के लिए बेहतर बनाते हैं।
बहरहाल, आम का सीजन शुरू हो चुका है। अमवारी सज उठी है। बाग बगीचे चहक उठे हैं। बाजार में भी आम आने लगा है। तो मौका भी है और दस्तूर भी… चक दे फट्टे, नप दे गिल्ली!
जब तक आम पक नहीं जाता तब तक आसानी से कच्चे आम मिल जाएंगे। इन्हें भूनकर स्वादिष्ट, सेहतमंद पना तैयार कीजिए और चटखारे लेकर उदरस्थ कीजिए।
- विनायक राजहंस







