लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के उद्यान विभाग (हार्टिकल्चर) में एक पीएचडी शोध छात्र ने अपने विभागाध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कुलपति से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। छात्र का दावा है कि लगभग छह महीने से वह मानसिक प्रताड़ना का शिकार है और फेलोशिप का आधा हिस्सा देने से इनकार करने पर धमकियां मिल रही हैं।
छात्र का नाम और आरोपों का खुलासा
शोध छात्र दिनेश कुमार मीना ने वीडियो संदेश के जरिए बताया कि वे उद्यान विभाग के शोध छात्र हैं। उनके अनुसार, विभागाध्यक्ष प्रो. मुफ्तलाल मीना (प्रो. एमएल मीना) लगातार उन्हें परेशान कर रहे हैं।
छात्र ने आरोप लगाया:
- पहले प्रोफेसर छात्रों से डरा-धमकाकर हर महीने 1000 रुपये वसूलते थे।
- अब फेलोशिप का आधा पैसा मांग रहे हैं।
- निजी काम करवाने के साथ-साथ घी, कपड़े और मोबाइल रिचार्ज जैसी अनुचित मांगें रखी जा रही हैं।
- मना करने पर फेलोशिप रोकने और शोध कार्य बर्बाद करने की धमकियां दी जा रही हैं।
दिनेश कुमार मीना ने कहा, “ऐसे प्रोफेसर छात्रों और उनके भविष्य के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं। मुफ्तलाल मीना जैसे दूषित मानसिकता वाले और छात्र-विरोधी प्रोफेसर के खिलाफ सभी छात्रों को एकजुट होकर लड़ाई लड़नी चाहिए, ताकि सख्त से सख्त कार्रवाई हो सके।”
छात्र की मांगें :
- प्रार्थना पत्र में छात्र ने कुलपति से तीन मुख्य मांगें की हैं:तुरंत सुपरवाइजर (विभागाध्यक्ष) बदल दिया जाए।
- पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- दोषी प्रोफेसर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
छात्र का कहना है कि लगातार तनाव के कारण उनकी मानसिक स्थिति प्रभावित हुई है और वे चिकित्सकीय उपचार भी ले रहे हैं।
विश्वविद्यालय में बढ़ते उत्पीड़न के मामले
यह घटना बीबीएयू में शोध छात्रों के साथ मानसिक और अन्य प्रकार के उत्पीड़न की लगातार बढ़ती शिकायतों को फिर से उजागर करती है। पहले भी विश्वविद्यालय में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहां छात्रों ने सुपरवाइजर या प्रोफेसरों पर गंभीर आरोप लगाए थे।
छात्रों का कहना है कि ऐसे मामलों में विश्वविद्यालय प्रशासन को त्वरित और पारदर्शी जांच करनी चाहिए, ताकि शोध की गरिमा बनी रहे और मेधावी छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो।
अभी तक विश्वविद्यालय की प्रतिक्रिया:
अभी तक बीबीएयू प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। छात्रों और शिक्षाविदों की नजर कुलपति के अगले कदम पर टिकी हुई है। अब क्या यह मामला छात्रों के अधिकारों की जीत बनेगा या फिर दब जाएगा? सभी की नजरें अब जांच और कार्रवाई पर हैं।






